बिहार में पक रही है नए महागठबंधन की खिचड़ी, लालू बना रहे रणनीति

बिहार में कुछ दिनों पूर्व तक राजद, जदयू और कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी. राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसे महागठबंधन का नाम दिया था. अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का प्रेम पुराने मित्र भाजपा की तरफ उमड़ आया तो और वह एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी के साथ चले गए.

इसके बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव के लिए नया समीकरण बुनना शुरु कर दिया है. आहिस्ते आहिस्ते राजद इस समीकरण पर काम करना शुरु कर चुका है. लालू प्रसाद यादव बिहार में जिस नए महागठबंधन के लिए काम कर रहे हैं उसमें अब मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी भी शामिल हो सकती है.

लालू के पास आज भी माय समीकरण की जबर्दस्त ताकत है पर वो अच्छी तरह जानते हैं कि माय समीकरण संघर्ष की ताकत दे सकता है पर सिर्फ इस समीकरण के बूते वो सत्ता में नहीं पहुंच सकते इसीलिए लालू की निगाह बिहार के पांच फीसदी चमार वोटरों पर है. इस समुदाय के लोग भले हीं बसपा को वोट न देते हो, पर जैसे हीं राजद और बसपा का तालमेल हो जाए और उन्हें लगें कि हमारा गठबंधन सीधी लड़ाई में है तो उनका रुझान बसपा की तरफ होने की प्रबल संभावना है.

लालू इस लड़ाई में वामपंथी दलों को भी साथ लाने के इच्छुक हैं. अगर लालू अपनी प्लानिंग में कामयाब हो जाते हैं तो अगले चुनाव में आप राजद, कांग्रेस, बसपा और वामपंथी दलों के नए महागठबंधन को चुनावी समर में देख सकते हैं. लालू की इस पहल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन प्राप्त है. संभव है कि 243 सीटों में लालू कुछ सीटें एनसीपी और समाजवादी पार्टी के लिए भी छोड़ दे.

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