बिहारी पहचान हमारी शान 10: कभी राजभवन का हिस्सा हुआ करता था चिड़ियाघर

बिहार की राजधानी पटना घूमने वाला शायद हीं कोई पर्यटक हो जो चिड़ियाघर न जाता हो.  बेली रोड के राजवंशी नगर स्थित इस चिड़ियाघर को संजय गांधी जैविक उद्यान या संजय गांधी बायोलाॅजिकल पार्क के नाम से जाना जाता है. इस उद्यान में 800 से ज्यादा पशु पक्षियों की प्रजातियां रहती हैं. इस चिड़ियाघर में लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का कार्य भी होता है. पटना चिड़ियाघर ने कैप्टिव ब्रीडिंग में काफी सराहनीय कार्य किया है. कैप्टिव ब्रीडिंग का मतलब अनुकूल, प्रतिकूल परिस्थितियों में पशु पक्षियों की प्रजातियों की वंश वृद्धि होता है.


चिड़ियाघर की स्थापना और इतिहास
इस चिड़ियाघर की स्थापना 1970 में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो के प्रयासों से हुआ था. इस चिड़ियाघर की स्थापना के लिए उन्होंने राजभवन यानी राज्यपाल आवास की 34 एकड़ जमीन हस्तांतरित की. पर्यावरण प्रेमी कानूनगो ओड़िशा सके आते थें. 1972 में इस चिड़ियाघर का बायोलाॅजिकल पार्क कर दिया गया. बाद के दिनों में राजस्व विभाग ने इस पार्क को अपनी 58.20 एकड़ और पीडब्लयूडी विभाग ने अपनी 60.75 एकड़ जमीन हस्तांतरित की. वर्तमान में यह पार्क 153 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है.
प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण और बेहद शांत वातावरण में पक्षियों की चहचहाहट, बीच बीच में सिंह गर्जना, हाथियों की चिंघाड़ और हरी भरी वादियां बरबस हीं पटना घूमने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस चिड़ियाघर को जिसने देखा नहीं, उसका देखने का दिल करता है और जिसने देख लिया है, उसका बार बार देखने और घूमने का दिल करता है. फोटोग्राफी के शौकिन लोगों के लिए तो यह बेहतरीन कैनवास है.


मौजूद पशु पक्षी
वर्तमान में यहां चीता, शेर, बाघ, सफेद शावक, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा, हाथी, मगरमच्छ, हाथी, काला भालू, जिराफ, हिरण, बारहसिंगा, चिम्पैंजी, गैंडा, घड़ियाल आदि जानवर मौजूद हैं. इसके अलावा सैकड़ों किस्म की पक्षियों और सांपों की प्रजातियां मौजूद है.


चूंकि यह बाॅटनिकल गार्डेन है, इसलिए यहां पेड़ पौधों, और जड़ी बूटियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद है.
यहां के विशाल एक्वेरियम में तीन दर्जन से ज्यादा मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं वहीं सांप घर में 5 अलग अलग प्रजातियों के 32 सांप हैं.


इस पार्क में विभिन्न प्रजातियों के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए निरंतर शोध कार्य चलते रहते हैं. इसके लिए देश विदेश के अलग अलग चिड़ियाघरों से पशु पक्षियों का आदान प्रदान भी होता है. चिड़ियाघर प्रशासन पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए गोद लेने का कार्यक्रम भी चलाता है. गोद लेने वाले इन पशुओं के खाने पीने और इलाज का खर्च उठाते हैं. संबंधित पशुओं के पिंजरे के बाहर उसके पालक यानी गोद लेने वालों का नाम अंकित कर दिया जाता है. पटना सहित बिहार के कई पशु प्रेमियों ने जानवरों को गोद लिया है और बखूबी उनके जीवन यापन का जिम्मा उठा रहे हैं.


इसके अलावा इस चिड़ियाघर में बच्चों के इंटरटेनमेंट के लिए भी काफी कुछ है जिसमें टाॅय ट्रेन, झील, जंगल ट्रेल, चिल्डे्रन पार्क उन्हें खूब भाते हैं.
चिड़ियाघर घूमने में काफी वक्त लग जाता है, इसके लिए प्रशासन ने अंदर में रेस्टोरेंट्स भी बना रखें हैं जहां आपको इंडियन, चायनीज फूड मिलते हैं. आप चाहे तों यहां लंच, ब्रेकफास्ट भी ले सकते हैं और कोल्ड ड्रिंक चाय का भी आनंद उठा सकते हैं.


टिकट एवं पास
इस विशाल चिड़ियाघर में घूमने के लिए टिकट लेना पड़ता है. एक व्यस्क के लिए यह टिकट 30 रुपये का होता है जबकि बच्चों के लिए 10 रुपये का. स्टूडेंट्स के लिए ग्रुप टिकट 5 रुपये का आता है, पर इसके लिए ग्रुप में कम से कम 25 लोग होने चाहिए. वहीं माॅर्निंग वाॅक के लिए नियमित आने वालों के लिए मंथली पास सिस्टम है जिसके लिए आपको 250 रुपये देना होता है. क्वार्टरली पास 700 रुपये, अर्द्धवार्षिक 1200 रुपये और वार्षिक 2000 रुपये लगते हैं.
कैसे जाएं
पटना के किसी भी स्थान से चिड़ियाघर आने के लिए आॅटो, बस या टैक्सी सहज उपलब्ध है. बेली रोड की ओर जाने वाले सभी आॅटो चिड़ियाघर पहुंचाते हैं. चूंकि यह मुख्य सड़क पर अवस्थित है, इसलिए यहां पहुंचने में किसी किस्म की कोई असुविधा नहीं होती.

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