मयन ने मनाया स्लम के बच्चों के साथ अपना हैप्पी बर्थडे

कल हीं नन्हें मयन का जन्मदिन था. अपने पापा और मम्मी के साथ वो शैली के स्कूल पहुंचा और अपने जन्मदिन की खुशियां इन बच्चों के साथ शेयर किया. क्लास में ही छोटा सा इवेंट आॅर्गेनाइज हुआ और बच्चों के बीच पेंटिंग काॅम्पिटीशन हुआ. करीब 60 बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया और एक से बढ़कर एक ड्राइंग बनाकर दिखाया. मयन के पैरेंट्स ने बच्चों को गिफ्ट दिए और उनके साथ लिटिल पार्टी की. इस मौके पर मयन के पैरेंट्स ने बच्चों के जरुरत की चीजें भी उनके बीच डिस्ट्रिब्यूट किया.

जानिए क्या हैं भारतीय जन मोर्चा

आज के युग में जब हर इंसान सिर्फ अपने लिए जीना चाहता है. धनोपार्जन कर अपने लिए हर ऐशो आराम के साधन जुटाना चाहता है. जीवन का एक हीं उद्देश्य हो चुका है अपने लिए शानदार और वैभवपूर्ण जिंदगी. ऐसे समय में कौन देखता है कि जिस समाज में हमने जन्म लिया  और पले बढ़े हैं, वहां कोई अंतिम कतार में भी खड़ा है. जिसके लिए दो वक्त की रोटी भी किसी चुनौती से कम नहीं. ऐसे लोग भी हैं जिनके छत पर तिरपाल की छत है और तन पर पैबंद लगे कपड़े, शिक्षा तो उनके लिए दूर की बात है. अब इनके लिए कौन सोचने वाला है ! गाड़ी में बैठे बैठे कभी इनकी गुरबत पर नजर पड़ गई तो यह कहकर निकल लिए कि दुनिया में कितना गम है…

स्वार्थ से परिपूर्ण इस युग में हम सैल्यूट करना चाहते हैं, बीजेएम को. जिन्होंने अपनी जिंदगी को स्लम के बच्चों की जिंदगी बनाने में झोंक रखा है. नया टोला की रहने वाली शैली एक पढ़ी लिखी और क्वालिफाइड युवती हैं जिन्होंने जीवन के हर रंग को जिया है, पर आज वह समर्पित हैं पटना के स्लम के बच्चों को शिक्षित, संस्कारी और सभ्य बनाने के लिए.

स्लम में रहने वाले बच्चे जो कूड़ा चुनने बीनने का काम करते हैं. बेतरतीब बाल बढ़ाए और बिखेरे रहते हैं. न जाने कितने कितने दिनों पर नहाते थें. जिनको देखते हीं हमारे आपके जैसे लोगों के चेहरे पर घृणा का भाव आ जाएगा., बीजेएम ने वैसे बच्चों को स्कूल पहुंचाने और उन्हें सभ्य बनाने का बीड़ा उठाया. उन्हें भी समाज में बैठने लायक बनाने का संकल्प लिया. शैली ने अपनी संस्था बीजेएम यानी भारतीय जन मोर्चा की मदद से 500 से भी ज्यादा बच्चों को स्कूल पहुंचाया है. शैली बीजेएम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं. बीजेएम का उद्देश्य समतामूलक समाज की स्थापना है, जिसमें शिक्षा पर हर नागरिक का समान अधिकार हो. इतना हीं नहीं स्लम की कई लड़कियां और महिलाएं जो दूसरों के घरों में झाड़ू पोछा करती हैं, उन्हें भी शिक्षित बनाया है.

शैली इंग्लिश ग्रेजुएट हैं. पिछले दस सालों से अपने इस कार्य को बखूबी अंजाम दे रहीं है. पहले वह बच्चों को रेलवे ट्रैक के पास इकट्ठा कर पढ़ाती थीं पर अब उन्होंने अपने संसाधन से अपनी जमीन पर जनसहयोग से भवन बनाकर स्कूल शुरु किया है. शैली के इस प्रकल्प में कई जागरुक नागरिक भी उनकी मदद करते हैं.

शैली कहती है कि मेरी प्रेरणा भारत का संविधान है, जिसने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार दिया है. मैं चाहती हूं कि देश के हर नागरिक को समान शिक्षा और जीवनयापन का अधिकार मिलें, बस इसी उद्देश्य के साथ काम कर रही हूं.
बिहारी न्यूज बीजेएम के इस प्रयास को सलाम करता है.

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सरदार सिमरनजीत सिंह
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जानते तो जरूर होगे मुझे नहीं जानतेे तो कोई बात नहीं अब जान लो........ नाम तो जरूर सुना होगा नहीं सुना तो कोई बात नहीं अब सुन लो..... बिहारी हूं, अपनी धुन में रहता हूं धुन का पक्का नहीं पर मन का सच्चा हूं. पत्रकारिता और लेखन शौक है. बिहार के सासाराम का रहने वाला हूं,

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