सृजन घोटाले से जुड़े हैं भाजपा सांसद के तार, इसके पैसे से खोला शोरुम

घोटालों की फेहरिश्त में एक और नया नाम जुड़ गया सृजन घोटाला. माना जा रहा है कि यह 800 करोड़ रुपये का घोटाला है. इस घोटाले का केंद्र बिहार का भागलपुर जिला है पर इसमें कई जगह के लोग शामिल हैं. इनमें कई सफेदपोश, सांसद, विधायक, मंत्री, प्रशासनिक पदाधिकारी, बैंक अधिकारी और सरकारी कर्मी भी के नाम भी उजागर होने के संकेत मिले हैं.
क्या है सृजन घोटाला
जिस तरह से इस घोटाले की परत दर परत खुलती जा रही है, उससे यह घोटाला नहीं बल्कि महाघोटाला साबित हो सकती है. बिहार में सरकारी राशि के गबन का यह सबसे बड़ा मामला हो सकता है. पहले इस घोटाले को 150 करोड़ का बताया जा रहा था पर जैसे जैसे दस्तावेज मिलते गए, यह 800 करोड़ तक पहुंच गया है.
सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर एक गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ रजिस्टर्ड है. इस एनजीओ ने सरकारी खजाने से अरबों रुपये की हेराफेरी की है. इसकी सचिव प्रिया कुमारी तथा उनके पति अमित कुमार इसके कर्ताधर्ता थें.
राज्य सरकार से जिले के तीन सरकारी बैंकों में फंड लाया जाता था. इस फंड को राजनीतिक रसूख, डीएम आॅफिस भागलपुर और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सृजन के छह अलग अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था. सृजन को आॅपरेटिव बैंक की तरह काम करती थी. इससे जुड़े सफेदपोश इस पैस से जमीन और इंटरेस्ट का धंधा करते थें. इसके साथ हीं ब्लैक मनी को व्हाईट में बनाने का खेल भी खूब होता था. सबसे ज्यादा अवैध राशि निकासी भू अर्जन विभाग से हुई है.
यह गोरखधंधा 2008 से हीं जारी था. 2008 से लेकर अब तक सृजन के बैंक खातों के ट्रांजैक्शन कीं जांच के आदेश दे दिए गए हैं, इसके साथ हीं सात लोगों की गिरफ्तारी भी हो गई है, हालांकि गिरफ्तारी सिर्फ प्यादों की हुई है. खेल के बादशाह और वजीर अब तक कानून के शिकंजे से बाहर हैं.


राजनीतिज्ञ भी शामिल

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस  पूरे प्रकरण में भाजपा के दो सांसदों के परिवारवालों के पास भी पैसे  पहुंचने की बात सामने आयी है. इनमें एक सांसद के परिवार वालों ने इसी पैसे  से शोरूम खोल रखा है. हालांकि, इस मामले में अभी और सबूत जमा किये जा रहे  हैं, ताकि इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके. इसके अलावा कुछ अन्य दलों के  नेताओं के नाम भी सामने आने की आशंका है. इनके पास भी सृजन के पैसे सीधे  या इनके परिवार के किसी करीबी सदस्य के पास पहुंचे हैं. मालूम हो कि जब यह घोटाला चल रहा था, उस वक्त बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी थें. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी सुशील कुमार मोदी को इस मामले में पक्षकार बनाने की मांग की है. लालू ने पूछा कि कैसे संभव है कि बिना वित्त मंत्री की सहमति से इतनी बड़ी राशि की निकासी हो जाए. इतना हीं नहीं सृजन के संचालकों की कई सारी तस्वीरें केंद्रीय मंत्रियों, राज्य सरकार के मंत्रियों और सांसदों के साथ सोशल मीडिया पर चल रही है, जो बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बड़ी मात्रा में दाल काली है.

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