बिहारी पहचान 19: इस बिहारी अफसर ने स्वच्छ भारत अभियान में हासिल किए अवाॅर्ड और बनाए रिकाॅर्ड

बिहार की माटी ने कई ऐसे रत्नों को जन्म दिया है जो राज्य से बाहर जाकर भी बिहार के मस्तक को उंचा उठाने का काम कर रहे हैं. आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे हीं बिहारी आइएएस अधिकारी की जो स्वच्छ भारत अभियान का गौर बना है.

हम बात कर रहे हैं गुजरात के नर्मदा जिले के जिलाधिकारी डाॅ रणजीत कुमार सिंह की. रणजीत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान को दिल से लिया और इसे सफल बनाने में मुस्तैदी से जुट गए. रणजीत ने बतौर जिलाधिकारी इस अभियान को सफल बनाने के लिए ईमानदार कोशिश की. यही कारण हैं कि उन्हें इस क्षेत्र में शानदार भूमिका निभाने के एवज में दो दो पुरस्कारों से नवाजा गया. ये दोनों ही पुरस्कार केंद्रीय पुरस्कार हैं.

गांधी जयंती के अवसर पर उल्लेखनीय योगदान हेतू डाॅ रणजीत को मिले दो पुरस्कारों में पहला स्वच्छता दर्पण अवार्ड है जो नर्मदा जिले को स्वच्छ भारत मिशन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मिला तो दूसरा अवार्ड केंद्रीय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा दिया गया.

स्वच्छता दर्पण अवार्ड जहां गुजरात के पोरबंदर में महामहिम राष्ट्रपति की उपस्थिति में गर्वनर और सीएम ने दिया तो वहीं केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में विभागीय मंत्री उमा भारती ने दिया. चूंकि दोनों अवार्ड समारोह एक हीं वक्त पर था तो दिल्ली में रणजीत की जगह उनके जिले के स्वच्छ भारत मिशन के डायरेक्टर ने प्राप्त किया. मालूम हो कि स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डाॅ रणजीत को गुजरात रत्न अवार्ड भी हासिल हो चुका है. इसके साथ हीं स्वच्छता मिशन को लेकर इनका नाम लिम्का बुक्स आॅफ रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है.

गांव की बाढ़ ने बना दिया आईएएस

रणजीत कुमार सिंह  बताते हैं कि जब में पांचवी क्लास में था तब हमारे गांव में बाढ़ आयी थी. हमें इस परेशानी से निकालने वाला कोई नहीं था सभी लोग डीएम खोज रहे थे. तभी मेरे दादा जी ने मुझसे कहा कि बनना है तो डीएम बनकर दिखाओ.

रणजीत का जन्म बिहार के वैशाली जिले के देसरी गांव में हुआ. इनके पिता का नाम श्री रामटहल सिंह और माता का नाम महादेवी पटेल हैं. रणजीत इसी गांव में पले बढ़े और खेले कूदें. रणजीत का कर्मक्षेत्र भले हीं गुजरात हो, पर वह गर्व से खुद को बिहारी बताते हैं. बिहारियों की मेधा की तारीफ करने वाले रणजीत के बिहार के प्रति लगाव को इसी से समझा जा सकता है कि ये बिहार से ज्यादा से ज्यादा लोगों को यूपीएससी,बीपीएससी परीक्षा में सफल बनाने के लिए मिशन 50 संस्थान  चला रहे है. डॉ आनंद राज के निर्देशन में यह संस्था प्रतिवर्ष (अब दो बार)  चयनित 50 छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहा है. इस बार चयन परीक्षा 15 अक्तूबर को है. इस GS आधारित चयन परीक्षा में 50% अंक प्राप्त करने वालों को यूपीएससी/ बीपीएससी का सिलेबस बोरिंग रोड, नया टोला और बाजार समिति ब्रांच में पढ़ाया जायेगा. इसके लिए आवेदन आमंत्रित किया जा रहा है.

डाॅ रणजीत का मानना है कि बिहार में भी रहकर सिविल सेवा की तैयार की जा सकती है.  मैं खुद बिहार में ही रहकर सफल हुआ. डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने 2008 में सिविल सेवा की परीक्षा पास की. वर्तमान में वे गुजरात के नर्मदा जिले में जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं और गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं.

 

5 (100%) 1 vote
सरदार सिमरनजीत सिंह
About सरदार सिमरनजीत सिंह 1095 Articles
जानते तो जरूर होगे मुझे नहीं जानतेे तो कोई बात नहीं अब जान लो........ नाम तो जरूर सुना होगा नहीं सुना तो कोई बात नहीं अब सुन लो..... बिहारी हूं, अपनी धुन में रहता हूं धुन का पक्का नहीं पर मन का सच्चा हूं. पत्रकारिता और लेखन शौक है. बिहार के सासाराम का रहने वाला हूं,

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*