दक्षिण भारत में ठण्ड के मौसम में उपजेगी अब बिहार की शाही लीची

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बिहार(Bihar) के मुजफ्फरपुर(Mujaphpharpur) का शाही लीची देश-दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिये प्रसिद्ध है। अब इस लीची को दक्षिण भारत में भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई जाएगी। बिहार के लोग सामान्यतः गर्मी के मौसम में लीची का स्वाद लेते हैं लेकिन दक्षिण भारत में लोग इसका स्वाद ठण्ड के मौसम में ले पाएंगे।

मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक, विशालनाथ (Vishalnath) के अनुसार इस बार ठण्ड के मौसम में कनार्टक, केरल और तमिलनाडु में लीची उपजाने की तैयारी की जा रही है। दक्षिण भारत में लीची उगाने का प्रयास राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा पिछले सात वर्षों से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केरल के वायनाड, इडुक्की अैार कल्पेटा, कनार्टक के कोडबू, चिकमंगलूर और हसन तथा तमिलनाडु के पलानी हिल्स व ऊंटी जिलों में लीची की बागवानी आरम्भ हुई है।

 


इन जिलों में किसानों को लीची की बागवानी करने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं. लीची उतपादन के लिए वहाँ की जलवायु सर्द के मौसम के लिए ही अनुकूल है. वर्ष 2012-13 में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने दक्षिण भारत के इन राज्यों में लीची के बागवानी का आरम्भ किया था. विशालनाथ के अनुसार दक्षिण भारत के राज्यों में एक पुष्ट लीची का वजन 40 ग्राम होने की सम्भावना जताई जा रही है।
बता दें कि देश के लीची उत्पादन में बिहार का योगदान 40 फीसदी है। आंकड़ों के अनुसार बिहार में 32,000 हेक्टेयर में लीची की खेती की जाती है। बिहार की शाही लीची को जीआई टैग (जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन) मिल गया है। दुनिया में प्रसिद्ध बिहार की लीची को जीआई टैग मिल जाने के बाद यह देश-विदेश में खास ब्रांड बन गया है।
बता दें कि बिहार की शाही लीची अपने मीठे स्वाद और खास सुगंध के लिए पसंद की जाती है। यह मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण और बेगूसराय के इलाकों में उपजाई जाती है।

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