घड़ी के विज्ञापन में हमेशा क्यों दिखता है 10 बजकर 10 मिनट का समय, जानिए कारण

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विज्ञापन के माध्यम से हम किसी भी सामान के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है. ऐसे में लोग विज्ञापन के माध्यम से भी सामान को खरीदते हैं. लेकिन इन्ही विज्ञापन के बारे में कई ऐसी बातें हैं जिन्हें आप नहीं जानते होंगे. तो चलिए आपको हम बताते हैं घड़ी के इस विज्ञापन के बारे में. जरा सोचिए आपने अक्कर देखा होगा कि watch ads में 10 बजकर 10 मिनट का समय ही हमेशा दिखाया जाता है. आपने कभी सोचा है कि हमेशा घड़ी के विज्ञापन में हमेशा 10 बजकर 10 मिनट ही क्यों दिखाया जाता है. तो चलिए आज हम आपको विस्तार से बताते हैं इस विज्ञापन के बारे में.

  

मीडिया में चल रही खबरों की माने तो घड़ियों में हमेशा 10 बजकर 10 मिनट रहने के पीछे जो तर्क दिया जा रहा है उसमें यह कहा जा रहा है कि घड़ी में 10 बजकर 10 मिनट पर clock symmetrical नजर आती है. ऐसे में समरूपता का ध्यान मनोविज्ञान के नजरिये से रखा जाता है. कहा जाता है कि इंसान को वो चीजें देखना ज्जादा पसंद होती हैं जो समिट्रिकल हो. साथ ही 10 बजकर 10 मिनट पर समय की सुइयां सबसे ज्यादा संतुलित नजर आती है. एक दूसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि 10 बजकर 10 मिनट पर घड़ी को अगर आप देखेंगे तो इसमें स्माइली का लुक दिखाई देगा. जिसका हम सबसे ज्यादा इस्तेमाल सोशल मीडिया पर करते हैं. स्मार्ट फोन आ जाने के बाद से लोगों के बीच में स्माईली काफी पोपुलर हो गया है. कहा जाता है कि दुकान में जब भी कोई घड़ी विज्ञापन के लिए लगी होती है तो देखने पर लगता है कि वह मुस्कुरा रही है. ऐसे में घड़ी खरीदने वाले के लिए उस घड़ी को लेकर सकारात्मक विचार उत्पन्न होता है.

साथ ही यह भी बताया गया है कि जब भी कोई व्यक्ति सफल होता है तो वह दो उंगुलियों का निशान दिखाता है जिसे हम विक्टरी भी कहते हैं. यानी की वह वी आकार का साइन बनाता है. अगर हम इस विक्टी को ठीक से समझेगे तो इसमें भी 10 बजकर 10 मिनट का समय दिखाई देगा. अगर आप 10 बजकर 10 मिनट को देखेंगे तो आपको विक्टरी का साइन दिखाई देगा. तो ऐसे में यह भी एक सकारात्मकता को दिखा रहा है.

घड़ी में 10 बजकर 10 मिटन को लेकर कई तरह के अफवाह भी है जैसे कि यह कहा जा रहा है कि अब्राहम लिंकन की मौत भी इसी समय हुई थी लेकिन आप सच्चाई को जानेंगे तो यह बताया गया है कि लिंकन को गोली रात में 10 बजकर 15 मिनट पर मारी गई थी और उनकी मौत सुबह के करीब 7 बजकर 22 मिनट पर हुई थी. इसी तरह से एक दूसरी अफवाह यह भी है कि विश्व में सबसे खतरनाक धमाकों में हिरोशिमा और नागासाकी दहल गया था कहा जा रहा है कि इस घटना का समय भी 10 बजकर 10 मिनट ही था. जबकि इसकी सच्चाई यह है कि सुबह के 11 बजकर 2 मिनट पर यह घटना हुई थी न की 10 बजकर 10 मिनट पर.

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