12 साल बाद बन रहा है ऐसा संयोग, जानिए आपके लिए कैसी है यह दीपावली

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दीपावली कार्तिक महीने के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है लेकिन इस बार दिपावली चतुर्दशी और अमावस्या दोनों तिथि एक साथ आ रही है. ज्योतिषाचार्य एवं पडितों की माने तो 27 की शाम को लक्ष्मी पूजा होगी. इस दिन गुरु, वृश्चक राशि में रहेगा. सूर्य और चंद्र तुला राशि में रहेंगे. इस साल से पहले भी इस तरह का संयोग बन चुका है जिसमें दीपावली मनाई जा चुकी है. 12 साल पहले 8 नवंबर 2007 को भी ऐसा ही योग बना था. उस समय शनि और केतु की युति थी, लेकिन ये ग्रह सिंह राशि में स्थित थे. 23 अक्टूबर 1995 को गुरु वृश्चिक राशि में था और तब भी चतुर्दशी युक्त अमावस्था तिथि पर दीपावली का पर्व मनाया गया था.

दीपावली पर्व मनाने के पिछे यह मान्यता है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस मंथन में ही कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. इसके बाद भगवान विष्णु ने लक्ष्मी का वरण किया था. इसलिए हर साल कार्तिक अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है. समुद्र मंथन से देवताओं के वैद्य भगवान धनवंतरि भी प्रकट हुए थे. इनकी पूजा धनतेरस पर की जाती है.

रविवार, 27 अक्टूबर की सुबह चतुर्दशी तिथि रहेगी और शाम को अमावस्या रहेगी। इस वजह से रविवार को ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। देर रात लक्ष्मी पूजन करने के पिछ मान्यता है कि जो लोग दीपावली की रात जागकर लक्ष्मी पूजा करते हैं, उनके घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
शुक्रवार, 25 अक्टूबर की सुबह द्वादशी तिथि और शाम को धनतेरस रहेगी. पंचांग भेद से 26 अक्टूबर को रूप चौदस रहेगी. 27 अक्टूबर को भी सुबह रूप चौदस रहेगी और प्रदोष कालीन अमावस्या रात में होने से दीपावली 27 को ही मनाना श्रेष्ठ है. जो लोग अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहते हैं, उन्हें सोमवार, 28 अक्टूबर की सुबह श्राद्ध कर्म करना चाहिए. श्राद्ध कर्म के लिए सुबह का समय श्रेष्ठ रहता है और 28 अक्टूबर की सुबह अमावस्या तिथि रहेगी.

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