क्रिकेट प्रेमियों के लिए खुशखबरी 18 साल बाद होगी बिहार की रणजी में वापसी

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15 नवम्बर 2000 को जब झारखंड बिहार से अलग हुआ था तब किसी ने नहीं सोचा था कि इसका प्रभाव बिहार के खेलों पर भी पड़ेगा. जिसमे भी आज के बेस्ट क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का राज्य रह चूका बिहार देश के भीतर होने वाले tournaments में ही अपनी पहचान खो देगा.इसका एक कारण ये भी हैं कि तब के बिहार के क्रिकेट का headquarter जमशेदपुर में था जो कि विभाजन से झारखंड में चला गया. 2004 में बिहार एसोशिएशन को suspend कर दिया गया था.

लेकिन अभी उम्मीद जग चुकी हैं लगभग 18 वर्षों तक पीछे रहने के बाद बिहार की क्रिकेट टीम ने domestic cricket tournament में वापिसी की हैं. अब इस साल सितम्बर में होने वाले रणजी trophy में बिहार भी अपनी टीम के साथ खेलने वाला एक राज्य होगा.

Board of Control for Cricket in India (BCCI)  ने मंगलवार को ये सुखद घोषणा की हैं कि इस वर्ष बिहार की टीम भी रणजी खेलने मैदान में उतरेगी.

सौरव गांगुली के नेतृत्व में technical committee ने ये तय किया हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गयी Committee of Administrators (CoA) के recommendation को मानना हैं और इस साल रणजी ट्राफी में बिहार की टीम को भी शामिल करना हैं.

Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने ये भी कहा कि कोर्ट ने ये order 4 जनवरी को दिया था तब तक सभी घरेलू सीजन के मैच खत्म हो चुके थे,इस कारण बिहार इस साल domestic tournaments में खेल नहीं सका था. लेकिन अब बिहार के रणजी ट्रोफी में शामिल होने से कुल टीमों की संख्या 29 हो जायेगी.

गोपाल सुब्रमण्यम ने बिहार क्रिकेट association की लगाई याचिका की सुनावाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच को ये बात बताई थी जिसमे Justice A.M. Khanwilkar और  Justice D.Y. Chandrachud भी शामिल थे.

वास्तव में कोर्ट ने ये order 4 जनवरी को दिया था जब बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के आलोक वर्मा ने कोर्ट में ये कहा था कि 15 नवम्बर 2000 को झारखंड बनने के बाद से बिहार को रणजी ट्राफी,दिलीपट्राफी और अन्य किसी भी domestic tournament में खेलने का मौका नहीं मिला हैं.

कोर्ट ने BCCI के सभी state affiliates को apex cricketing body के draft constitution पर अपने suggestions देने को भी कहा. ये BCCI के 3 टॉप members C.K. Khanna, Amitabh Chaudhary और Anirudh Chaudhry को  Suggestions देने को कहा हैं.

कोर्ट ने उन्हें 3 दिन का समय दिया हैं और गोपाल सुब्रमणियम को suggestions को submit करवाने को कहा हैं, जो कि 11 मई की सुनवाई के दौरान कोर्ट को सबमिट करेंगे.

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