शिक्षक दिवस विशेषः एक ऐसी शिक्षक जो घंटों पैदल चलकर जाती थी पढ़ाने, बनी IAS अधिकारी

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आज हर कोई अपने शिक्षक को याद कर रहा है, आज हर कोई अपने उस गुरु को याद कर रहा है जिनकी बदौलत उन्हें एक मुकाम हासिल हुआ है. जिनकी बदौलत आज वे कुछ करने की हिम्मत रख रहे हैं. देश में हमें कई ऐसे गुरु शिष्य परंपरा के उदाहरण मिल जाएंगे. आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ऐसी शिक्षक की जो घंटों पैदल चल कर स्कूल पढ़ाने जाती थी लेकिन मन में एक अधिकारी बनने की लालसा रखती थी. उस शिक्षक का नाम है सीरत फातिमा.

सीरत पातिमा उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में करेली की रहने वाली है. उनके पिता अब्दुल गनी सिद्दीकी एक सरकारी कार्यालय में अकाउंटेंट का काम करते थे, सीरत 4 साल की थी तो पिता ने सोच लिया था एक दिन उनकी बेटी IAS बनेगी. सीरत उनकी सबसे बड़ी बेटी है. उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में एडमिशन कराया जबकि उनके पास घर चालने के लिए पैसे नहीं होते थे. इस लिए सरिता ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीरत फातिमा ने इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से B.Sc.और B.Ed की डिग्री ली, फिर बाद में प्राइमरी स्कूल में टीचर की नौकरी करने लागी.

जब वह स्कूल में पढ़ाने जाने लगी तो उन्हें 38 किलोमीटर दूर स्कूल में पढ़ाने जाना पड़ता था.  जिसके लिए उन्हें पहले 30 किलोमीटर बस से, उसके बाद वह 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थी. अपनी मन में पल रहे UPSC के सपने को पूरा करने की इच्छा जगी. सरिता स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करती थी.

सीरत फातिमा ने कहा कि मैंने एक शिक्षक के रूप में काम करना शुरू कर दिया क्योंकि मेरे पिता के वेतन से घर का खर्चा चलना मुश्किल हो रहा था. स्कूल जाने के कारण उन्हे UPSC के तैयारी के लिए समय नहीं मिल पाता था, जिस से तीन बार UPSC की परीक्षा में सिलेक्शन नहीं हो पाया, जिसके बाद परिवार वालों ने शादी के लिए दवाब देने लगे जिसके चलते उनको शादी करनी पड़ी. उनके मन में पल रहे UPSC के सपने को पूरा करने की इच्छा जगी रही, घर और नौकरी के साथ साथ वो अपनी तैयारी में भी लगी रही. उन्होंने नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मांझी-द माउंटेनमैन फिल्म देखी जिसको देख कर वो काफी मोटिवेट हुए वह कहती हैं कि फिल्म ने मुझे फिर से जीवंत कर दिया और परिणाम आप सभी के सामने है.

साल 2016 में छह नंबरों से वो सेलेक्ट होने से रह गई थीं, उसके बाद प्राारंभिक परीक्षा में सफलता मिली. छोटे नोट्स बनाकर रास्ते में पढ़तीं थी और घर पर लिखकर तैयारी करतीं. इस तरह उन्होंने चौथे अटेंप्ट में मेन्स भी निकाल लिया. साल 2017 के रिजल्ट में 990 उम्मीदवार शामिल थे, जिनमें से 810वें स्थान पर सीरत फातिमा का नाम आया तो उनके पिता को बेटी की सफलता से की सबसे ज्यादा खुशी थी. वर्तमान में फातिमा इंडियन एंड ट्रैफिक सर्विस में तैनात हैं.

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