विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में लोकसभा का उपचुनाव होना तय, जानिए अब कौन बनेगा यहां से सांसद

जी हां, सही समझा आपने. हम बात कर रहे हैं बाल्मिकीनगर की. पिछले दिनों ही बाल्मिकीनगर के सांसद बैद्यनाथ महतो का निधन हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में बैद्यनाथ महतो ने जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर जीत दर्ज की थी. बैद्यनाथ महतो ने इस सीट पर कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय को भारी मतों के अंतर से परास्त किया था.

बैद्यनाथ महतो बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते थें. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो बैद्यनाथ महतो 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर लड़कर तीसरे नंबर पर चले गए थें और जमानत भी किसी तरह से बचा पाएं थें, उनके लिए नीतीश कुमार ने इस सीट को भारतीय जनता पार्टी से अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के लिए ले लिया था.

बाल्मिकीनगर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इस संसदीय सीट के तहत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें बाल्मिकीनगर विधानसभा क्षेत्र, रामनगर विधानसभा क्षेत्र, नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र, बगहा लोकसभा क्षेत्र, लौरिया लोकसभा क्षेत्र एवं सिकटा विधानसभा क्षेत्र शामिल है.

बाल्मिकीनगर लोकसभा क्षेत्र 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अस्तित्व में आया. इसके पहले यह बगहा लोकसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है.यह लोकसभा क्षेत्र नेपाल अंतरराष्ट्रीय बाॅर्डर के काफी करीब है.
अब बात करते हैं चुनावी आंकड़ों की तो पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर जदयू उम्मीदवार रहे स्वर्गीय बैद्यनाथ महतो को कुल वोटों का 58 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थें. बैद्यनाथ महतो को जहां कुल 06 लाख, 02 हजार 660 वोट मिले थें तो वहीं कांग्रेस, राजद गठबंधन के उम्मीदवार शाश्वत केदार को 02 लाख 48 हजार 044 वोट ही मिल सके थें.

शाश्वत केदार बिहार के पूर्व सीएम केदार पांडेय के पौत्र हैं और कांग्रेस के युवा नेता हैं. बात करें अन्य उम्मीदवारों की तो इस सीट पर मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी का भी अच्छा खासा जनाधार देखने को मिलता है. एनडीए की आंधी में भी इस सीट पर बसपा के दीपक यादव को 62 हजार 963 वोट मिले थें. एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश साह को करीब 15 हजार वोट मिले थें. वहीं बाल्मिकीनगर लोकसभा क्षेत्र के 34 हजार 338 लोगों ने नोटा के पक्ष में मतदान किया था.

अब जबकि बैद्यनाथ महतो इस दुनिया में नहीं रहें तो इस सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट जल्द ही शुरु हो सकती है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस सीट पर जदयू किसे अपना प्रत्याशी बनाएगी ! भाजपा का तो इस सीट पर चुनाव लड़ने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है.

आंकलन है कि जदयू इस सीट पर किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को उतार सकती है. इसमें सबसे पहला नाम सिकटा से जदयू के विधायक और बिहार की नीतीश सरकार में गन्ना विकास मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद का हो सकता है क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में अल्पसंख्यक वोटर जदयू से नाराज दिखाई दे रहा है और इसे साधने के लिए जदयू अल्पसंख्यक उम्मीदवार का दांव चल सकता है.

वहीं बात करें महागठबंधन की तो यह सीट किसके कोटे में जाएगी, यह फिलहाल तय नहीं है क्योंकि राजद, रालोसपा, हम और वीआईपी के समर्थन के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी की काफी बुरी हार हुई थी.

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