जानिए, एक ऐसी कंपनी के बारे में जिसने लॉकडाउन में अपने वर्कर को अपने पास रखा खाना खिलाया और वेतन भी दिया

0
517

कोरोना वायरस के कारण देश में लागू लॉकडाउन के कारण हजारों लोगों की नौकरी चली गई. कई लोग तो अपनी नौकरी छोड़कर अपने गांव चले गए. गांव आने के बाद सबसे पहली समस्या उनके सामने आई नौकरी की, पैसे की. ऐसे में उन्हें एक बार फिर से शहर ही याद आने लगा लेकिन इन सब के बीच में एक ऐसी भी कंपनी है जिसने अपने कामगारों के लॉकडाउन में कही जाने नहीं दिया. उन्होंने उन्हें रहने खाने की सुविधा दी.

आज हम बात कर रहे हैं के.पी.आर मिल्स की जिसके मालिक ने 17500 प्रवासी मजदूरों को अपने यहां रहने खाने की सुविधा मुहैया कराई. आपको बता दें कि यह कंपनी अंडरवियर बनियायन बनाती है. इस कंपनी के पास भारत के साथ ही विश्व के ज्यादातर देशों से माल बनवाने के ऑडर आते हैं. यह कंपनी तिरुपुर और कोयंबटूर में है. इस कंपनी की चार फैक्ट्रियां हैं. जिसमें 22000 वर्कर काम करते हैं.

रामास्वामी ने 17,500 हजार जो माइग्रेंट लेबर थे (4500 लोकल, निकट के अपने घर पर रहे) उसको अपनी फैक्ट्री के ही हॉस्टलों में ठहरने को कह दिया और कहा कि जब तक भी लॉकडाउन चलेगा तुम लोग चिंता मत करो, तुम्हारा सारा खाना पीना ठहरना, यहां तक की मोबाइल की चार्जिंग भी मेरी तरफ से फ्री.रामास्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया “प्रति लेबर ₹13500 मासिक का उसका खर्चा आया और इस नाते से कुल 30 करोड रूपया, लगभग 2 महीने में खर्च हो गया. क्योंकि उसने एक भी आदमी की एक भी दिन की सैलरी भी नहीं काटी.

जब उनसे पूछा गया कि आपने इतना नुकसान क्यों सहन किया? तब   उन्होंने कहा “मैंने दोनों बातें सोची. एक तो यह मेरी नैतिक जिम्मेवारी थी कि मैं इनको बेरोजगार ना करूं, आखिर मुझे इतना बड़ा बनाने में इन्ही लोगों का ही तो हाथ है. फिर मुझे यह भी था की लॉकडाउन के बाद मुझे भी स्किल्ड लेबर नहीं मिलेगी. इस कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 3250 करोड़ का है लेकिन बड़ी बात है, केपी रामा स्वामी जी ने लेबर के बारे में उच्च स्तरीय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया. भारत ऐसे ही लोगों के सहारे चल रहा है…..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here