बक्सर से कौन बनेगा सांसद?

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पूर्वांचल के रास्ते बिहार का द्वार कहा जाने वाला गंगा किनारे बसा बक्सर संसदीय क्षेत्र बक्सर की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान है। पुराणों में इसे महर्षि विश्वामित्र की धरती कहा गया है। यहीं चौसा में शेरशाह ने मुगल शासक हुमायूं को पराजित किया था। अंग्रेजों की सेना ने बंगाल, अवध और मुगलों की संयुक्त सेना को हरा देश में ब्रिटिश हुकूमत की बुनियादी रखी थी।

बक्सर बिहार का भोजपुरी भाषी इलाका है. गंगा नदी के तट पर स्थित बक्सर काफी उपजाऊ इलाका है. बक्सर संसदीय सीट बीजेपी का गढ़ रही है. 1996 से सिर्फ 2009 को छोड़कर यहां बीजेपी जीतती रही है. यहां सवर्ण वोट खासकर ब्राह्मण वोटरों का काफी दबदबा है. बक्सर लोकसभा सीट में ब्राह्मण वोटरों की अच्छी संख्या है. यही वजह है कि इस सीट से लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में सवर्ण या ब्राह्मण उम्मीदवार जीतते रहे हैं. लालमुनि चौबे लगातार 4 बार सांसद रहे। 2014 के चुनाव में भाजपा के अश्विनी कुमार चौबे राजद के जगदानंद सिंह को हराकर सांसद बने।

बक्सर लोकसभा सीट से स्वतंत्रता के बाद प्रथम दो आम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कमल सिंह विजयी रहे, 1977 में भारतीय लोकदल के रामानंद तिवारी को यहां से जीत मिली. 1980 और 1984 में कांग्रेस के कमलकांत तिवारी दो बार इस सीट से सांसद रहे. 1989 और 1991 में तेज नारायण सिंह 2 बार सांसद बने. वहीं 1996 से 2004 तक लगातार चार बार BJP के लालमुनी चौबे सांसद निर्वाचित हुए.लालमुनी चौबे 1996, 1998, 1999 और 2004 में बक्सर सीट से चुनाव जीते 2009 में RJD के जगदानंद सिंह विजयी रहे।

प्राचीन काल में इसका नाम व्याघ्रसरथा। सुप्रसिद्ध बक्सर की लड़ाई शुजाउद्दौला और कासिम अली खां की और अंग्रेज मेजर मुनरो की सेनाओं के बीच यहीं 1764 में लड़ी गई थी। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां बड़ा मेला लगता है। यह क्षेत्र भगवान राम के प्रारंभिक जीवन से भी जुड़ा माना जाता है। यहां गुरु विश्वामित्र के आश्रम में राम और लक्ष्मण की शुरुआती पढ़ाई हुई थी। वही ताड़का का वध राम ने यहीं किया था। यहां बिहारी का प्रमुख मंदिर भी है। यह क्षेत्र प्रदेश की राजधानी पटना से करीब 118 किलोमीटर दूर है।

२०१४ के चुनाव में पहले स्थान पर अश्विनी चौबे रहे जिन्हें 319012 वोट मिले. कुल वोटों का यह 35.92 प्रतिशत था. दूसरे नंबर पर आरजेडी के जगदानंद सिंह रहे जिन्हें 186674 (21.02 प्रतिशत) वोट मिले. इन दोनों उम्मीदवारों के बीच वोट का अंतर काफी ज्यादा था. तीसरे स्थान पर बीएसपी के ददन यादव थे जिन्हें 184788 (20.8 प्रतिशत) वोट मिले. इनमें 53.5 प्रतिशत पुरुष और 46.5 प्रतिशत महिला वोटर थे।

वही हमारे चैनल के द्वारा एक सर्वे किया गया जिसमे शाहाबाद के सबसे लोकप्रिय मुखिया माने जाने वाले प्रमोद कुमार तिवारी जी से हमारी बात हुई की कौन बनेगा सांसद और इसके साथ ही शाहाबाद से जुड़ी बिकास के कार्यो सहित अन्य मुद्दे पर हमारी बात मुखिया प्रमोद कुमार तिवारी जी से हुई। अब उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं की लगातार तीन बार चुनाव जीतकर जित की हैट्रिक लगा चुके हैं और शाहाबाद के हर जाती धर्म के लोगो के बीच लोकप्रिय होने के कारण शाहाबाद के लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता प्रमोद कुमार तिवारी माने जाते हैं। ब्रह्मपुर, बिहार के बक्सर जिले में स्थित एक शहर और बहुत प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक जगह है। यह मुख्य रूप से भगवान शिव के मंदिर की पौराणिक कथा और देश भर से लोग भगवान शिव के मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के लिए यहां आते हैं।

बक्सर लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें ब्रह्मपुर, बक्सर, डुमरांव, राजपुर, रामगढ़ और दिनारा शामिल हैं. राजपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ पर मतदाता 1820040 पुरुष 967292 महिला 852748 हैं। बक्सर में 19 मई को सातवें और अंतिम चरण में मतदान होगा। वही नतीजा 23 मई को आएंगे।

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