बिहार पंचायत चुनाव टला तो फंस जाएगा एक और चुनाव!

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बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में अब देरी होना तय माना जा रहा है. क्योंकि इस बार बिहार में EVM के माध्यम से पंचायत चुनाव कराने की बात कही गई है. जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन आयोग से NOC की मांग की लेकिन निर्वाचन आयोग से NOC नहीं मिलने के कारण यह मामला पटना हाईकोर्ट में पहुंच गया है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि अगर यह फैसला राज्य निर्वाचन आयोग के पक्ष में भी आता है तो बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में देरी होना तय है. ऐसे में अब यह भी कहा जा रहा है कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने की स्थिति में पंचायतों का कामकाज बाधित नहीं हो. इसके लिए बिहार सरकार पंचायती राज अधिनियम में संशोधन की भी बात कह रहा है. जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होने पर उनकी शक्ति अधिकारियों के पास होगी. अब यह कहा जा रहा है कि बिहार सरकार दोनों ही मामलों पर विचार कर रही है. अगर बिहार में पंचायत चुनाव होता है तो सरकार चुनाव की तैयारियों में लग जाएगी अगर नहीं होता है तो फिर 15 जून के बाद से जनप्रतिनिधियों की शक्ति अधिकारियों के पास चली जाएगी.

मीडिया में चल रही खबरों की माने तो आयोग ने EVM सप्लाई के लिए जिस कंपनी का मॉडल तय किया है, उसे बनाने के लिए कम से कम एक महीने का समय चाहिए. राज्य में एक साथ छह श्रेणी के ढाई लाख पदों पर चुनाव कराने हैं. उसके अनुरूप EVM को एसेंबल करने में समय की जरूरत होती है. उस हिसाब से मई का पहला हफ्ता पर कर जाएगा. नौ चरणों में चुनाव कराने के लिए सरकारको कम से कम दो महीने का वक्त चाहिए. ऐसे में 15 जून तक चुनाव संपन्न कराना आयो ग के लिए आसान नहीं होगा. आपको बता दें कि पिछले दिनों पटना हाईकोर्ट में हुई सुवनाई में दोनों ही आयोग को यह कहा गया था कि इस मामले में बातचीत करके मामले का सामाधान निकाल लें. लेकिन दोनों के बीच में किसी तरह की कोई बैठक नहीं हुई.और न ही कोई रास्ता निकल पाया. ऐसे में अब एक बार फिर से सभी लोगों की निगाहें पटना हाईकोर्ट की तरफ है. आपको बता दें कि पंचायती राज संस्थानों का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है.

पंचायत चुनाव में देरी होती है तो विधान परिषद चुनाव परपड़ सकता है असर

बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में अगर देरी होती है तो इसका असर बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की सीटों के लिए होने वाले चुनावों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है. आपको बता दें कि अगले महीने इन सीटों के लिए निर्वाचित विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है. इन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में पंचायत चुनाव के निर्वाचित प्रतिनिधि ही मतदाता बनते हैं. ऐसे में 15 जून के बाद वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां समाप्त हो जाएगी. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि अगर पंचायत चुनाव में देरी होती है तो विधान परिषद का चुनाव भी टलना तय माना जा रहा है. पंचायत चुनाव का मामला फंसता देख कई राजनीति पार्टी के नेताओं की सांस अटकने लगी है.

जिन विधान पार्षदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें राधाचरण साह, मनोरमा देवी, रीना यादव, संतोष कुमार सिंह, सलमान रागीव, राजन कुमार सिंह, सच्चिदानंद राय, टूनजी पांडे, राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता, दिनेश प्रसाद सिंह, सुबोध कुमार, हरिनारायण चौधरी, राजेश राम, दिलीप कुमार जायसवाल, संजय प्रसाद, अशोक कुमार अग्रवाल, नूतन सिंह, सुमन कुमार, आदित्य नारायण पांडे और रजनीश कुमार शामिल हैं.

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