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घरेलु क्रिकेट में मचाया कोहराम, अंतराष्ट्रीय स्तर पर क्यों हो गया फुस्स ?

घरेलु क्रिकेट का सितारा, अंतराष्ट्रीय स्तर पर क्यों नहीं बिखेर पाया अपनी चमक ?

घरेलु क्रिकेट में जो है बंगाल का दूसरा सबसे सफल गेंदबाज

जिसने अपनी रफ़्तार और एक्यूरेसी से उड़ाए बल्लेबाजों के स्टंप

अंतराष्ट्रीय स्तर पर मौका ना मिलना, आईपीएल प्रदर्शन के लिए आलोचना झेलने के बाद ले लिया संन्यास

खिलाड़ी जिसने कभी कोशिशों से नहीं लिया संन्यास, क्रिकेट से संन्यास के बाद खेली राजनितिक पारी, आज हैं विधायक

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दोस्तों, क्रिकेट का मैदान हो या फिर जिंदगी का सफर हर कोई अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहता है. भारतीय क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्होंने घरेलु क्रिकेट में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाए और उसी घरेलु क्रिकेट के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका भी मिला लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर वो अपनी चमक नहीं बिखेर पाए. इतिहास में कई ऐसे क्रिकेटर हुए हैं आज उसी कड़ी में एक ऐसे ही क्रिकेटर की जीवनी लेकर हम हाजिर हैं.

अपनी रफ्तार और घातक गेंदबाजी से कोहराम मचाने वाले इस खिलाड़ी ने घरेलु क्रिकेट में रिकॉर्ड के अंबार लगा दिए लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर फ्लॉप हो गए. दोस्तों, आज के अंक में टीम इंडिया के तेज गेंदबाज अशोक डिंडा की बात होगी. इस लेख में हम अशोक डिंडा के जीवन से जुड़ी कुछ जानीअनजानी और अनकही बातों को जानने की कोशिश करेंगे.

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अशोक डिंडा का जन्म 25 मार्च 1984 को पश्चिम बंगाल के मोयना में हुआ था. अशोक के पिता का नाम भीम डिंडा और मां का नाम संध्या रानी है. बचपन से ही डिंडा को क्रिकेट में दिलचस्पी थी इसलिए पढ़ाई से ज्यादा वो अपने खेल पर ही फोकस करते थे. यही वजह थी कि युवावस्था में ही डिंडा ने लोकल टूर्नामेंट और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर अपना नाम बना चुके थे. अशोक डिंडा के पास रफ़्तार के साथसाथ एक्यूरेसी भी थी, जो उन्हें एक खतरनाक गेंदबाज बनाती थी. स्टंप को कई मीटर दूर उखाड़ फेंकने की कला ने उन्हें बंगाल क्रिकेट टीम के दरवाजे तक खड़ा कर दिया था. अब बस इंतजार था उस दरवाजे के खुलने का. और वो दरवाजा जब खुला तो डिंडा ने दिखा दिया कि वो क्या चीज हैं. घरेलु क्रिकेट में अशोक डिंडा के आंकड़े उन्हें भारतीय घरेलु क्रिकेटरों की लिस्ट में एक खास जगह दिलाते हैं. घरेलु क्रिकेट में बंगाल की तरफ से खेलते हुए डिंडा ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 420 विकेट चटकाए जबकि लिस्ट ए क्रिकेट में 151 विकेट हासिल किए. उत्पल चटर्जी के बाद अशोक डिंडा ही बंगाल के सबसे सफल गेंदबाज हैं. 2017-18 रणजी ट्रॉफी में अशोक डिंडा बंगाल के लीडिंग विकेट टेकर थे, इस सीजन डिंडा ने 8 मैचों में कुल 35 विकेट अपने नाम किए थे. इतना ही नहीं इसके अगले सीजन भी 28 विकेट के साथ वो टीम के लीडिंग विकेट टेकर गेंदबाज रहे थे. 2018 के जुलाई महीने में दलीप ट्रॉफी के लिए डिंडा को इंडिया ग्रीन स्क्वाड में चुना गया था.

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घरेलु क्रिकेट में लाजवाब प्रदर्शन का इनाम उनको मिला जब 2009 में उन्हें भारत की अंतराष्ट्रीय टीम में उन्हें चुना गया था. भारत का प्रतिनिधित्व करना डिंडा के लिए किसी सपने का पूरा होने जैसा था, उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. अपने इंटरनेशनल डेब्यू पर अशोक डिंडा ने 3 ओवर डाले जहां उन्होंने 34 रन देते हुए सनथ जयसूर्या को अपना शिकार बनाया था. तारीख था 9 दिसंबर साल 2009, विधर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, नागपुर जहां भारत और श्रीलंका के बीच टी20 मैच खेला गया था. इस मैच में डिंडा के अलावा आशीष नेहरा ने भी अपना टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था और भारतीयत टीम को 29 रनों से हार मिली थी. अशोक डिंडा ने अपना वनडे डेब्यू जून, 2010 में जिम्बाब्वे के विरुद्ध किया था. अपने पहले एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय मैच में डिंडा ने 7 ओवर फेके थे, जिसमें उन्हें 1 भी सफलता नहीं मिली थी. अंतराष्ट्रीय स्तर पर निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद साल 2010 में श्रीलंका में आयोजित एशिया कप के लिए अशोक डिंडा भारतीय स्क्वाड में जगह पाने में सफल रहे थे. हालाँकि टूर्नामेंट में सिर्फ 1 मैच में उन्हें खेलने का मौका मिला था, जहां उन्होंने 5 ओवर डाले थे और यहां भी उनके हाथ खाली ही रहे. एशिया कप 2010 के बाद डिंडा को भारतीय टीम से ड्रॉप कर दिया गया. डिंडा निराश जरुर थे लेकिन हिम्मत नहीं हारे थे, उन्होंने कोशिश जारी रखी, कोशिश एक बेहतरीन और सफल गेंदबाज बनने की. अशोक डिंडा ने मेहनत से कभी मुंह नहीं मोड़ा.

अंतराष्ट्रीय स्तर पर विफल होने के बाद अशोक डिंडा एक बार फिर घरेलु क्रिकेट में रम गए. रणजी सीजन 2011-12 में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद अशोक डिंडा को वापस भारत की अंतराष्ट्रीय टीम से बुलावा आया. 2012 एशिया कप के लिए डिंडा को एक बार फिर भारतीय टीम में चुना गया और इस बार डिंडा का प्रदर्शन संतोषजनक था. इसी चलते उनका चयन इसके बाद श्रीलंका दौरे के लिए भी हो गया.

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उस दौरे पर खेले गए एकमात्र टी20 मुकाबले में अशोक डिंडा ने 19 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे, जिसके बाद भारतीय टीम ने 39 रनों से मैच अपने नाम किया था. बावजूद इसके डिंडा को गिनेचुने मौके ही मिले. उन्होंने अपना अंतिम टी20 इंटरनेशनल 27 दिसंबर, 2012 को पाकिस्तान के विरुद्ध खेला था जबकि आखिरी वनडे 11 जनवरी, 2013 को इंग्लैंड के खिलाफ.

अपने अंतराष्ट्रीय करियर में अशोक डिंडा ने 13 वनडे और 9 टी20 मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने कुल 29 विकेट चटकाए. अशोक डिंडा आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग का भी जाना माना चेहरा रहे. आईपीएल में उन्होंने कुल 4 टीमों का प्रतिनिधित्व किया. डिंडा आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स, दिल्ली डेयरडेविल्स, पुणे वारियर्स, और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का हिस्सा रहे. आईपीएल में डिंडा का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था, जिसके चलते वो प्रशंसकों और आलोचकों के निशाने पर भी आए. उनकी जमकर आलोचना हुई, सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया.

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इस बात पर डिंडा कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं कि वह बंगाल घरेलु क्रिकेट के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं बावजूद इसके आईपीएल प्रदर्शन के चलते उन्हें लगातार आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है. अंतराष्ट्रीय स्तर पर जगह ना बना पाने के कारण और लगातार हो रहे आलोचनाओं के चलते अशोक डिंडा ने 2019 में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी. लेकिन भारत के लिए एक भी टेस्ट नहीं खेल पाने की कसक उनके दिल में हमेशा रही. रिटायरमेंट के बाद अशोक डिंडा ने एक बयान में कहते हैं,यदि मैं अंतराष्ट्रीय स्तर पर टेस्ट मैच में भी अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पाता तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होती.” खैर इसी बीच 10 दिसंबर, 2020 को डिंडा ने तय किया कि वो अब बंगाल की तरफ से घरेलु क्रिकेट नहीं खेलेंगे, उन्होंने बंगाल की टीम को अलविदा कह दिया और गोवा की तरफ से खेलने लगे. डिंडा ने तय किया कि वप 2020-21 सीजन में गोवा की तरफ से खेलेंगे.

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अशोक डिंडा के निजी जीवन की बात करें तो वो 22 जुलाई, 2013 को लंबे समय की दोस्त श्रेयसी रुद्रा से शादी के बंधन में बंधे. 10 दिसंबर, 2017 को डिंडा के घर एक बेटी का जन्म हुआ था.

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क्रिकेट से संन्यास के बाद अशोक डिंडा ने एक नई पारी का आगाज किया ; राजनितिक पारी का. अशोक डिंडा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पूर्वी मदिनिपुर जिले के मोयना constituency से विधानसभा चुनाव लड़े और जीते. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के संग्राम कुमार को 1260 वोटों से हराया था और पहली बार MLA बने. राजनीति से पहले डिंडा को क्रिकेट कमेंट्री भी करते देखा गया था.

इस तरह हमने देखा कि एक घरेलु क्रिकेट का सूरज अंतराष्ट्रीय स्तर पर कैसे चमक नहीं पाया. आपके अनुसार डिंडा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा मौके नहीं मिलने के पीछे क्या वजह हो सकती है ? कमेन्ट में जरुर बताएं. चक दे क्रिकेट की पूरी टीम अशोक डिंडा के उज्जवल भविष्य की कामना करती है.

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