B.Ed के छात्रों के साथ हो रहे अन्याय पर चुप क्यों है सरकार , क्या ये एक बड़े घोटाले की है आहट !

बालिका गृह जैसे बड़े मुद्दे को लेकर दो महीना पहले जिस मुजफ्फरपुर पर हर किसी की नजर थी आज उसी मुजफ्फरपुर में बीएड के सैंकड़ो छात्र पिछले 6 दिनों से भूख हडताल पर है अभी तक न तो सरकार और न ही कोई विपक्ष का नेता छात्रों की हालत का जायजा लेने पहुंचे है।

राज्य में इनदिनों शिक्षा सहित कई मामलों को लेकर सरकार निशाने पर है। जहां एक तरफ राज्य में हिंसा चरम पर है वहीं सूबे की शैक्षणिक व्यवस्था भी कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। राज्य में हो रही घटनाओ के इतर सरकार सीट बंटवारे सहित कई अन्य मामले में लगी हुई है या बिहार के युवा नेता तेजस्वी के संविधान बचाओ यात्रा पर ध्यान गड़ाए बैठी है। वहीं मीडिया भी ज्वलनशील मुद्दों को छोड़कर रालोसपा के एक एक बयान और उसके भाव को दिखाने में और गायक खेसारी लाल यादव पर हुए हमले के विरोध में बिहार बंद की कवरेज करने में लगी हुई है। लेकिन किसी की नजर बिहार के उन सैंकड़ो युवाओ पर नहीं है जो पिछले कई दिनों से अपनी मांगो को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। उनकी मांग अवैध वसूली जो रोकना है जिसके कारण 1 लाख के जगह हर छात्र से डेढ़ लाख वसूला जा रहा है.

बिहार की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर में बीएड के बढ़ी हुई फ़ीस को वापस करने की मांग को लेकर पिछले 6 दिनों से BRABU मुजफ्फरपुर के लगभग 25 से अधिक कॉलेजो के सैंकड़ो छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हुए जिनमे कई छात्रों की तबियत बेहद खराब हो जाने के कारण उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है. परन्तु अभी तक सरकार के कान पर जूं तक नही रेंगी है और तो और न ही कोई सरकारी अफसर और न ही विश्वविद्यालय के अधिकारी इस मामले में कोई कदम उठा रहे है। क्या सरकार के किसी भी मंत्री या अधिकारी को उस छात्रों की चिंता नहीं है जो जिंदगी से जूझ रहे है ? सरकार में बैठे नेता की छोड़िये विपक्ष को इतना मौक़ा नहीं है कि वो इन छात्रों का हाल जाने या इनकी मांग को लेकर सरकार तक पहुचे।

क्या है पूरा मामला
जब से बीएड में द्विवर्षीय कोर्स की शुरुवात हुई है उसको लेकर राजभवन ने एक निर्देश जारी किया था कि बीएड कोर्स की कुल फ़ीस 95000 रुपये होनी चाहिए। इस मामले को लेकर राजभवन ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर कमिटी का गठन कर के फ़ीस निर्धारण करने का आदेश भी दे दिया था। जिसके बाद राज्य सरकार ने कमिटी गठित करके शुल्क 1 लाख रुपये निर्धारण भी कर दिया जिसके आधार पर छात्रों को 1 लाख रुपये फ़ीस के तहत ऑफर पत्र दिया गया और कॉलेज आवंटित किया गया। छात्रों ने राज्य सरकार के आदेश पर कॉलेजों में नामांकन करा लिया।

हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश
राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ राज्य के सभी बीएड कॉलेज फ़ीस मामले को लेकर कोर्ट में चले गए। इस मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने जुलाई-अगस्त 2018 में यह फैसला सुनाया कि बीएड की अधिकतम फ़ीस डेढ़ लाख होगी परन्तु उसके लिए यह शर्त है कि फ़ीस का निर्धारण कॉलेज के इंफ्रास्टक्चर के आधार पर होगा और किसी भी हालत में फ़ीस डेढ़ लाख से ज्यादा नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट के आदेश के बावजूद कॉलेजों ने वसुला अधिक फ़ीस
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी कॉलेज को अधिकतम राशि तब वसूल करना था जब उसका इंफ्रास्ट्रक्चर उस लायक हो ,इसके लिए जांच टीम भी जाने वाली थी परन्तु किसी प्रकार का जांच नहीं हुआ और सभी कॉलेजों ने अधिकतम राशि वसूल करना शुरू कर दिया। सबसे खराब स्थिति तब देखने को मिलने लगा जब छात्रों द्वारा पैसा भुगतान नहीं करने पर उनके क्लास अवरुद्ध कर दिए गए और परीक्षायै स्थगित कर दी गई। इसकी वजह से छात्रों का स्वर्णिम समय भी हाथ से निकल गया और सत्र लेट हो गई।

कॉलेज कर रही इस तरह से फ़ीस की वसूली
सत्र 2016-17 के छात्रों से बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के अंतर्गत सभी बीएड कॉलेजों ने नामांकन के समय 75 हजार रुपये वसूल किये। उसके बाद जब फ़ीस निर्धारण को लेकर मामला कोर्ट में गया तो कॉलेज प्रशासन और यूनिवर्सिटी द्वारा फिर से द्वितीय सेमेस्टर 75 हजार रुपये की मांग कर दी गई ,जबकि कोर्ट ने इसके लिए आदेश दे दिया था कि फ़ीस का अधिकतम राशि कई शर्तों को पूरा करने के बाद लेना है ,परनतु विश्वविद्यालय और कॉलेज कोर्ट की आदेश को अनसुना कर मनमानी फ़ीस लेने पर डटे रहे।

सबसे बड़ी बात यह है कि जब मामला कोर्ट में अटका हुआ था तब से ही कॉलेज छात्रों को दावा कर रही थी कि फ़ीस डेढ़ लाख रुपया ही होगा और उसी के हिसाब से पैसे वसूल किये जाएंगे। इस दौरान विरोध करने पर छात्रों का क्लास स्थगित भी किया गया और सत्र भी विलम्ब किया गया। वहीं जब सत्र 2017-19 के छात्रों को भी एक लाख रूपए का ऑफर लेटर देकर कॉलेज अलॉट किया गया है। जबकि नामांकन के बाद डेढ़ लाख वसूली की जा रही है। आखिर इस बड़ी अव्यवस्था की सच्चाई क्या है ? क्या ये राज्य के एक बहुत बड़े घोटाले का संकेत तो नहीं है ?
इस मामले को लेकर 2016-17 सत्र और 2017-19 सत्र के छात्रों ने कॉलेज की मनमानी और अवैध वसूली को लेकर कई बार विरोध भी किया परन्तु हर मामले जो दबा दिया जाता रहा। परन्तु इस बार मामला बेहद गंभीर है।

छात्रों का ये दर्द क्यों नहीं सुन रही सरकार
बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के कैम्पस में पिछले 26 अक्टूबर से छात्र इस फ़ीस वृद्धि को लेकर भूख हड़ताल पर है। बड़ी फ़ीस वापस करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। इस अनशन की वजह से कई छात्रों की हालत बिगड़ चुकी है जिनमे से अब तक तीन छात्रों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया जा चुका है। परन्तु अफ़सोस की बात यह है कि अब तक किसी भी पदाधिकारी या सरकार के मंत्री ने इस मामले को लेकर कोई पहल नहीं की है।

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