लोजपा का होगा रालोसपा का हाल, नीतीश के जाल में कैसे फंसते जा रहे चिराग

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बिहार की राजनीती वो दल-दल है जिसको आप जितना समझने का प्रयास करियेगा उसमे उतना फंसते चले जाईयेगा और बिहार के मुखिया नीतीश कुमार को आप जितना बांध कर रखने का प्रयास करियेगा आप खुद उस धागे से दूर होते चले जाईयेगा.

आप अब तक समझ गए होंगे हम किसकी बात कर रहे है. हम बात कर रहे है बिहार NDA में शामिल 2 दल जदयू और लोजपा की. कोरोना काल के शुरू होने से पहले ही इन 2 दलों के बिच बिहार में बवाल जारी है. याद होगा आपको लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार में कोरोना काल से पहले ” बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट “की अपनी बिहार यात्रा में नीतीश कुमार पर जमकर हल्ला बोला था.

उस समय से ही चिराग पासवान जदयू और खास कर नीतीश कुमार को निशाने पर लिए हुए है. किसी न किसी मुद्दे को पकड़ कर चिराग पासवान नीतीश कुमार पर उंगली उठाने से ना बाज़ आते है और ना ही पीछे हटते है. बिहार में अब कुछ महीनों में चुनाव होना है. चुनाव के समय अक्सर राजनितिक दलों के बिच का आपसी झगड़ा जनता का भरपूर मनोरंजन कराता है. राजनीती का यह एंटरटेनमेंट अब चुनाव तक लगातार जारी रहेगा. लेकिन कोरोना की वजह से इस बार एंटरटेनमेंट में थोड़ी गिरावट दर्ज की गयी है. इसके लिए बाक़ायदा राजनितिक दलों को माफ़ी मांगनी चाहिए। क्यों की 5 साल में यही तो एक समय है जब राजनितिक दल बड़ी-बड़ी सभा कर के जनता का मनोरंजन करती है. लेकिन राजनितिक दलों के वर्चुअल रैली ने जनता की मनोरंजन की आकांक्षांओं पर ही इस बार पानी फेर दिया है.

अब फिर से लौटते है चिराग और नीतीश पर , माना जा रहा है की लोजपा पिछली बार 2015 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी ,रालोसपा, जीतनराम मांझी की पार्टी हम और लोजपा एक साथ NDA थे उस समय लोजपा 40 सीटों पर चुनाव लड़ी थी यह अलग बात है की जित सिर्फ 2 पर ही मिली. इस बार उसका कहना है की उसे 50 से ज्यादा सीटें चाहिए क्यों पिछले बार NDA में 4 दल थे इस बार 3 ही है. लोजपा 50 सीट पर NDA से उम्मीदवार तभी उतार सकती है जब JDU 100 से कम सीट पर चुनाव लड़े जिसके लिए जदयू कभी तैयार नहीं होगी. सीटों के इसी खेल के लिए लोजपा नितीश कुमार के शासन की कमियां खोज उन पर लगातर हमलावर है. लेकिन नितीश कुमार की राजनीती के आगे बड़े-बड़ो को पस्त होते देखा गया है.

याद कीजिये कुछ ऐसा ही माहौल 2019 लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में देखने को मिला था. गठबंधन भी NDA का ही था. लड़ाई और कठोर से कठोर बयानबाज़ियां भी NDA के 2 दलों के बिच जमकर हुई थी. नाम था जदयू और रालोसपा। कहा जाता है की यह लड़ाई भी सीट को लेकर शुरू हुई थी. 2014 चुनाव के समय जब जदयू ने NDA का साथ छोड़ दिया था तो रालोसपा ,लोजपा के साथ मिल कर बीजेपी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. रालोसपा ने उस 2014 में 3 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी तीनों सीट जीते। लेकिन खबरों के अनुसार जदयू के NDA में शामिल होने के बाद उसे 2019 लोकसभा चुनाव में 3 के बजाय 2 सीट देने की बात कही गयी. इसी को लेकर उपेंद्र कुशवाहा जदयू से झगड़ा शुरू हुआ और नितीश कुमार ने इस झगड़े को इतना बढ़ाया की बाद में उपेंद्र कुशवाहा को NDA ही छोड़ना पर गया.

अब वही खेल फिर से जदयू खेल रही है इस बार रालोसपा की जगह लोजपा है. चिराग पासवान सीट ज्यादा पाने की चाहत में नीतीश कुमार पर दबाव बनाने की कोशिस की कर रहे है तो वही ऐसा लग रहा है की अब जदयू ने लोजपा को NDA से बाहर कराने का ही ठान लिया है. पहले जदयू सांसद ललन सिंह ने चिराग पासवान को कालिदास कहा और सोमवार को नितीश कुमार की सरकार में मंत्री जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव ने लोजपा और जदयू के बिच चल रही नोक-झोंक को अमरीका और रूस की लड़ाई घोषित कर दी है. यानि साफ है की अब जदयू लोजपा पर आगे इतने हमले करेगी की लोजपा खुद NDA छोड़ने को मज़बूर हो जाये। उसके बाद बिहार NDA में सिर्फ 2 दल बीजेपी और जदयू बचेगी। जिसके बाद NDA में सीटों के बंटवारे का सारा झंझट ही खत्म हो जायेगा।

बिना मास वोट के बिहार की सत्ता पर काबिज़ नितीश कुमार को राजनीती में कम आंकना की गलती बहुतो ने की है. उम्मीद है चिराग नितीश कुमार की राजनीती में नहीं फंसेंगे हालाँकि अभी के हालात तो यही इशारा कर रहे है की नितीश चिराग को जिधर ले जाना चाहते है चिराग के कदम उसी ओर जा रहे है. अभी समय है कम से कम विधानसभा चुनाव तक तनिक ठहर जाईये चिराग जी.

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