बिहार के होनहार कर रहे हैं बॉलीवुड में नाम

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बीते दिनों पहले रिलीज़ हुई फिल्म सुपर ३० सुपरहिट साबित हुईजैसा की हम सब जानते है की यह बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार की बायोपिक थी। यह फिल्म उनके और उनके छात्रों से प्रेरित थी, फिल्म को काफी सराहना मिली और नौ राज्यों में इसे कर मुक्त भी किया गया बिहारी परिदृश्य की इस फिल्म की विशेषता यह थी।इस फिल्म में बिहार के कई कलाकारों ने काम किया ,जिनमे पंकज त्रिपाठी एवं ३० बाल कलाकार थे जैसा की फिल्म में ३० गरीब बच्चों को IIT तक पहुंचने का सफर दिखाया गया है जो की संघर्षपूर्ण प्रेरणादायी और मनोरंजनपूर्ण है !‌बात करे कलाकारों की तो ३१ बच्चे पटना एवं आसपास के छेत्र से थे ,पटना के लोहानीपुर से 8 बच्चों ने इनमे काम किया जिनके नाम रोहित कुमार, घनश्याम, प्रिंस, सनी, सूरज, मनीष ,अश्वनी कविराज एवं मानसी कुमारी है !‌‌ये बच्चे छोटी उम्र से ही रंगमंच एवं अभिनय से जुड़े रहे है घनश्याम बताते है की वो अपने परिवार से पहले व्यक्ति है जो इस छेत्र में काम कर रहे है, ये राज्य स्तरीय बाल श्री सम्मान से भी सम्मानित है।घनश्याम के पिता भूंजा की दुकान चलाते है और अपने बेटे की उप्लभ्धि से खुश है और चाहते है की मेरा बेटा हीरो बने परिवार की भी यही इच्छा है ! घनश्याम नाट्य निर्देशन में भी रूचि रखते है और आगे इसमें काम करना चाहते है। बताते चले घनश्याम ने सुपर ३० में फुग्गा की भूमिका निभाई जिसे दर्शक और समीक्षको ने बहुत पसंद किया ।

वहीँ एक और कलाकार है रोहित जिन्होंने फिल्म में बांके का किरदार निभाया ,इनका किरदार भी प्रशंशनीय रहा ! बांके का किरदार आशावादी और दूरदर्शी है जो कम संसाधनों में भी आगामी भविष्य के लिए सपने देखता है और उन्हें पूरा करने के लिए हर कोशिश करता है। रोहित के परिवार में बड़े भाई बहन और माँ है, माँ हॉस्पिटल में मेड है और भाई प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करते है घनश्याम के घर वालों के तरह रोहित की माँ भी चाहती है की वो आगे अभिनेता बनेइन बच्चों के सपनो को पंख देने के लिए बिहार सरकार और किलकारी द्वारा सभी बच्चों को उपमुख़्यमंत्री और शिक्षामंत्री द्वारा सम्मानित किया गया । यह बिहार के लिए गर्व का विषय रहा की बिहार से इतने सारे कलाकारों ने बड़े दर्जे पे काम किया और अपने हुनर और अपनी कला से मुक़ाम बनाया।  

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