बिहार के 19 वर्षीय गोपाल को कई आविष्कारों के लिए मिल चुके हैं कई बड़े पुरुस्कार

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बिहार के भागलपुर के 19 वर्षीय गोपाल(Gopal) अबतक कुल दस अविष्कार कार्य कर चुके हैं. महज 14 वर्ष के उम्र में ही उन्हें यंगेस्ट साइंटिस्ट ऑफ इंडिया के पुरुस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनके द्वारा बनाये गए गोपनिम एलॉय के लिए नासा(नेशनल एरोनाॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) की तरफ से दो बार चिट्ठी भेजी गयी। 23 मई को नासा ने गोपाल के साथ काम करने के लिए पत्र भेजा लेकिन उन्होंने इससे ये कहते हुए इंकार कर दिया कि वे सिर्फ अपने देश के लिए कार्य करना चाहते हैं। उनका सपना है कि अपने आविष्कारों के द्वारा भारत को नोबल प्राइज दिला सके. उन्होंने अबतक कूल 10 अविष्कार किया है जिसमें चार पेटेंट के लिए भेजे गये हैं इनमें पेपर बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी(पेटेंट), बनाना बायो सेल(पेटेंट), गोपनियम एलॉय, जी-स्टार पाउडर, हाइड्रोइलेक्ट्रिक बायो सेल, सोलर माइल, गोपा-अलासका, सूडो प्लास्टिक, लीची वाइन आदि शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उन्हें 2017 में अहमदाबाद स्थित नेशनल इनोवेटिव फाउंडेशन में भेजा गया। यहाँ पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के सबसे युवा रिसर्च स्कॉलर के तौर पर काम करने का मौका मिला।
गोपाल बनाना(केला) नैनो क्रिस्टल और फाइबर पर काम कर रहे हैं. केले के तने से पहले नैनो फाइबर बनाया गया. ये तरल पदार्थों को सोखने का कार्य करते हैं। इससे ईंट तैयार की जा सकती है जो कभी पानी में नहीं डूबेगी। इसे फ्लोटिंग ब्रिक्स की संज्ञा दी गयी। इससे बनने वाले घर सामान्य घरों की अपेक्षा अधिक ठन्डे होंगे। इसका प्रयोग बच्चों के डायपर, सेनेटरी नैपकिन, बैंडएड आदि बनाने के लिए भी किया जा सकता है। इसके उपयोग किये जाने के पश्चात् जो फाइबर शेष रह जाता है उससे बुलेट शीट बनाया जा रहा है। केले के पत्तों से फाइबर शीट बनाया जा रहा है जिसकी मदद से फाइल कवर, टिशू पेपर और बुक कवर आदि बन सकता है। केले के पत्ते से निकलने वाले रस को फरमेंटेशन कर इथनॉल बनाया जा रहा है इसे वेपेराइज कर हेयर कलर बनाने में उपयोग किया जा रहा है। इन सभी का लैब में काम किया जा चुका है.

विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय के द्वारा नेशनल इंस्पायर अवार्ड, बिहार सरकार द्वारा स्टेट लेवल पर इंस्पायर अवार्ड, प्राइड ऑफ भागलपुर अवार्ड, कैरियर टुडे संस्था की ओर से ब्रेन ऑफ बिहार अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं. इसके अतिरिक्त अक्तूबर माह में उन्हें दिल्ली में नेशनल यूथ आइकॉन अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा.

आखिर किस प्रकार उनकी रुझान अविष्कार की तरफ गयी :

गोपाल के पिता किसान हैं और वे केले की खेती करते हैं। वे अपने पिता के साथ खेत जाया करते थे। 2008 में बाढ़ में काफी नुकसान हुआ और आर्थिक स्थिति ख़राब हो गयी। उन्होंने सोचा की केले के सभी बर्बाद होने वाले थंब(तना) से ऐसा कुछ अविष्कार करेंगे जो नुकसान की भरपाई कर सके. केले के थंब से रस लग जाने से दाग पड़ जाता है इसका मतलब की उसमें एसिड की गुणवत्ता होती है। वे जानते थे कि एसिड का एलेक्ट्रोलाइसिस कर चार्ज पैदा किया जाता है. वे स्कुल से वोल्ट मीटर और इलेक्ट्रोड लाये और केले के थंब पर यह प्रयोग किया तो उससे चार्ज बना जिससे बिजली उत्पन्न हुयी। इस प्रयोग से उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता पर पुरस्कृत किया गया.

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