क्या बिहार सरकार तैयार है, बढ़ते प्रदुषण से लड़ने के लिए ?

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अगर किसी से पूछें की इक्कीसवी शताब्दी में मानवजाति के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है, तो उत्तर होगा जलवायु परिवर्तन। दुनिया तप रही है, प्रदुषण हर सीमा पार कर रहा है.मानव इतिहास के एक ऐसे दौर में रह रहे हैं जिसमे कार्बन की मौजूदगी 415. 26 ppm है, जो की सबसे ज़्यादा है. नदियां और समंदर हमारा प्लास्टिक का कचरा खाने को मजबूर हैं. पिछले 40 वर्षों में वन्यजीवन 60 % से गिरा है. दुनिया के लिए अब बस ये एक चिंता की बात नहीं है, ये एक अलार्म है उस खत-रे का जिनसे शायद आगे आने वाली पीढ़ी कभी उभर भी ना पाए.

बिहार सरकार भी इस आपदा से लड़-ने की पूरी तैयारी कर रही है. यातायात विभाग ने ये बिलकुल साफ़ कर दिया है की बिना ज़रूरत के हॉर्न बजने पर कानूनी कार्यवाही होगी। इन हॉर्न्स से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और Motor Vehicles Act 1988 के तहत स-ज़ा का प्रावधान है. दूसरी तरफ Fertilizer बनाने वाली मशीनों पर सब्सिडी मिलेगी जिससे वायु प्रदुषण होता है और वातावरण गरम होता है. पिछले दो दिनों में प्रदेश के दो दिग्गज नेता राजीव प्रसाद रूडी और सुशिल कुमार मोदी ने गंगा में रहने वाले जीवों का मुद्दा उठाया है.

हम अपनी रोज़मर्रा के दिनचर्या में भी कुछ चीज़ों हैं जो कर सकते हैं. गर्मी में जब इस्तेमाल में न हों अपने विद्युत् उपकरणों को बंद रखें। ट्रैफिक में हॉर्न्स का इस्तेमाल ज़रुरत होने पर हीं करें और रेड लाइट पर इंजन बंद कर दें। अपने बच्चों और छोटे भाई बहनों को जलवायु परिवर्तन का मतलब समझाएं। प्रकृति जो बनाना जानती है उस तोहफे को वापस लेना भी जानती है. प्रकृति अगर सृजन जानती है तो विध्वं-श भी जानती है.

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