अपने निर्णयों पर अटल रहकर बिहार की ज्योति ने हासिल किया यह बड़ा मुकाम

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ऊँचें सपने देखना और फिर विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसे हासिल करने की सोच पर टिके रहना और फिर उसके लिए मेहनत करना बावजूद सफलता हासिल नहीं होने पर फिर से उम्मीद करना और सफलता पाने तलक आशान्वित होकर कड़ी मेहनत करते रहना खुद में एक मिशाल है वो भी आज के दौर में भी एक लड़की के लिए यह बड़ी बात है और उससे भी बड़ी बात है उसके गरीब माता-पिता का इस बात के लिए राजी होना समय तक इंतजार करना।

बिहार के कहलगांव की रहने वाली ज्योति ही नहीं बल्कि उनकी सफलता के लिए उनके माता-पिता के भी हिम्मत को सलाम किया जाना चाहिए। ज्योति के माता और पिता साथ मिलकर मिठाई की दुकान चलते हैं. उन्होंने अपने बेटी ज्योति को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में नामांकन करवाने का फैसला ले लिया। वहां ज्योति ने इतिहास में ग्रेजुएशन किया। अपने पॉकेट खर्च निकलने के लिए वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी और खुद की भी पढाई जारी रखा.

ज्योति ने वर्ष 2014-15 में यूपीएससी की परीक्षा दी जिसमें उसने 524 वीं रैंक हासिल किया। इस रैंक के हासिल होने से नौकरी तो मिल जाती है लेकिन आईएएस का पद नहीं मिल सकता है. इसके लिए उसे 100 वीं रैंक में आने की जरुरत थी. इसी वजह से वह अपने इस सफलता पर उतना भी खुश नहीं थी. इस सफलता के बाद दिल्ली में दूरसंचार विभाग में एडीजी के पद पर वह कार्यरत हो गई. इसके पूर्व वह दो बार इस परीक्षा में असफल हो चुकी थी. फिर ज्योति ने अपनी पढाई जारी रखी और और वर्ष 2017 में ज्योति ने यूपीएससी परीक्षा में 50 वीं रैंक हासिल कर लिया और वह आईएएस बन गई.
नौकरी करते हुए उसने अपनी पढाई जारी रखी. ज्योति ने इस परीक्षा को लेकर कहा कि वे यह काफी कठिन परीक्षा है. इसमें सफलता पाने के लिए धीरज और धैर्य के साथ कड़ी मेहनत करना आवश्यक है.
आज भी लड़कियों को आगे बढ़ सकना आसान नहीं है. आज भी संघर्ष करने होते हैं और समाज में वर्षों से चली आ रही कुरीतियों से लड़ना होता है. बिहार में लड़कियों को नारी सशक्तिकरण से जोड़ा जाने के लिए और भी प्रयास की जरुरत है. ज्योति और उनके माता-पिता जिस तरह अपने निर्णय पर दृढ़ता रखी वह काबिल -ए -तारीफ है साथ ही वे बिहार की लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं.

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