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पहाड़ियों से घिरी वादियाँ, जिधर देखो बस उधर हरियाली ही हरियाली, उसके बीच में, सड़क से गुजरते आप. झरनों की गूंज, चट्टानों की शान्ति, लहराती हुई वनस्पतियाँ और वन्य जीवों के बीच जो आत्मिक आराम आप महसूस करेंगे जरा सोचिये ये सब कुछ कितना मनमोहक होगा. अक्सर आपलोग प्रकृति के इस सौन्दर्य को निहारने के लिए लेह लद्दाख के सफर पर निकलते हैं लेकिन मैं कहूँ कि ये खूबसूरती आप बिहार में आकर महसूस कर सकते हैं. तो आपका रिएक्शन क्या होगा? बिहार को गरीब, गवार और खुद को बिहारी कहने पर शर्मिंदा महसूस करने वाले लोगो को आज मैं लेकर चलूंगी कैमूर हिल्स के सफर पर. जिसे अगर बिहार का स्वर्ग कहें तो गलत नहीं होगा. ऐसी ही कैमूर हिल्स की वादियाँ. कैमूर की पहाड़ियां लगभग 483 किलोमीटर लंबी विंध्य पहाड़ियों का पूर्वी भाग है. जो मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में कटंगी से बिहार के सासाराम जिले के आसपास तक फैला हुआ है. यह पहाड़ियां जो भारतीय उपमहाद्वीप में अरावली के साथ सबसे पुरानी चट्टान संरचनाओं में से एक हैं, जो की मुख्य रूप से पुरानी आग्नेय चट्टानों से मिलकर बनी है. इसके शानदार रूप और सुन्दर आकार आप देख सकते हैं. यहाँ पर बहने वाली नदियाँ दुर्गम और ऊँचे घाटियों से होकर गुजरती है. जो की कई अनोखे और विहंगम दृश्य वाले झरने का निर्माण करती है. पूरब में रूद्र नदी का किनारा, और पश्चिम से आती कर्मनासा व दुर्गावती की धारा. मानसून के समय में telhar kund jaise झरनों की अलौकिक खूबसुरती और दुर्गम घाटियों के विहंगम दृश्य यहाँ के वातावरण को सुकून और रोमांच से भर देता है.

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ये पहाड़ियां सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर नहीं है बल्कि अतीत के पन्नों में इस घाटी की शौर्य गाथा के अनेकों उल्लेख मिलते हैं. मध्ययुगीन इतिहास के दौरान खोजे गए शिलालेखों, शैलचित्र और उपलब्ध दस्तावेज, इसके गौरव और महिमा की पुष्टि करते हैं. जो की आज तक कैमूर की पहाड़ियों को लोगो के बीच मशहूर बनाती है.

इन पहाड़ियों पर पाए जाने वाले पौराणिक अवशेष , संरक्षित किले , हिन्दू देवी देवताओं के पौराणिक और रहस्यमय मंदिर जिनमें से एक है अतिप्राचीन माँ मुंडेश्वरी देवी का मंदिर इस घाटी की लोकप्रियता को और भी खूबसूरत बनाते है. प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है| यह स्थान पर्यटकों को उन्हें प्रकृति के करीब होने का एहसास कराता है. कैमूर घाटी की जैव विविधता, तरह तरह के पंछी ,अनेको जंगली जानवर , मूल्यवान आयुर्वेदिक औषधियां , रहस्य्मय मंदिर, दुर्गम किले ,प्राकृतिक जलप्रपात पर्यटकों के सफर को उत्साहित , अनूठा और रोमाँचित बनाता है. रोहतास गढ़ के पास बाण्डा गांव की पूरब पहाड़ी की गुफाओं में मिले शैलचित्र से स्पष्ट है कि प्राचीन काल से ही मानव सबसे सुरक्षित स्थान पर आवास बनाता रहा है. यह मानव के आखेटक जीवन की झांकी का मनोरम चित्रण है. शैलचित्र पुरापाषाण काल एवं मध्यपाषाण काल के शैलाश्रयों में उत्कीर्ण चित्रों से तत्कालीन मानव की कलात्मक अभिव्यक्ति प्रकट होती है.

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इस क्षेत्र में बलुआ पत्थर की प्रधानता है किंतु कहींकहीं परिवर्तित चट्टाने भी प्रचुर मात्रा में मिलती है। रोहतास गढ़ क्षेत्र के मध्य छोटी किंतु अत्यंत उपजाऊ घाटियाँ स्थित हैं। पहाड़ों की ढालें अत्यंत खड़ी एवं दुर्गम है परंतु बीच बीच में दर्रे हैं। चुनार गढ़, विजय गढ़ तथा रोहतास गढ़ के किलों के कारण इन श्रेणियों का ऐतिहासिक महत्व हैं।

बिहार में रोहतास प्राचीन काल से ही विकसित संस्कृति का क्षेत्र रहा है। यहां बिखरीं पड़ीं धरोहरें इतिहास के कालखंडों के रहस्यों को अपने गर्भ में छिपाए हैं। इन सब खूबियों से भरा है अपना बिहार. आप हमें कमेन्ट कर जरुर बताएं की आप कैमूर की वादियों में अटखेलियाँ करने कब पहुँच रहे हैं.

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