बिहार के हीरेंद्र झा की किताब ‘मीडिया के दिग्गज’ की धूम

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पत्रकारों का काम है ख़बर देना लेकिन, एक पत्रकार ऐसा भी है जो इन पत्रकारों की ख़बर लोगों तक पहुंचाने में जुटा है. हम बात कर रहे हैं भागलपुर, बिहार के हीरेंद्र झा की. हीरेंद्र इनदिनों दैनिक जागरण डिजिटल टीम मुंबई के साथ मनोरंजन डेस्क पर सहायक संपादक का काम देख रहे हैं. साथ ही वो अपनी पहली किताब ‘मीडिया के दिग्गज ‘ के लिये चर्चा में हैं.
दरअसल इस किताब में टीवी, रेडियो और समाचार पत्रों के अनुभवी जनों और दिग्गजों के साक्षात्कार प्रकाशित हुए हैं.
टीवी से पुण्य प्रसून बाजपेयी, दीपक चौरसिया, शम्स ताहिर ख़ान जैसे दिग्गज हैं तो वहीं अखबार के अनुभवी संपादक ओम थानवी और शशिशेखर आदि के इंटरव्यू हैं.  रेडियो से अमीन सायानी, खुराफाती नितिन और ओपी राठौड़ के नाम हैं. इनके अलावा किताब में वेद प्रताप वैदिक, अजीत अंजुम, मुकेश कुमार, आलोक पुराणिक, पराग छापेकर, राहुल देव, दारैन शाहिदी और वर्तिका नंदा के इंटरव्यू भी शामिल किये गये हैं. पुस्तक में कुल 16 मीडिया दिग्गजों के इंटरव्यू हैं.
बीते सितंबर में 12 तारीख को लखनऊ, 15 तारीख को मुंबई और 30 सितंबर को दिल्ली में पूरे गाजे बाजे के साथ ‘मीडिया के दिग्गज’ का विमोचन भी हुआ. हीरेंद्र कहते हैं कि अभी और शहरों जैसे भोपाल, जयपुर, पटना और भागलपुर में भी वो अपने किताब पर कार्यक्रम करेंगे. वो कहते हैं कि – मेरी कोशिश है कि इस किताब के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ख़बर पहुंचे. अब एक चीज आई तो कम से कम पाठकों तक ये बात पहुंचनी भी तो चाहिये. फिर वे तय करें कि पढ़नी है या नहीं पढ़नी है. मेरा काम है उनतक यह संदेश पहुंचा देना कि ऐसी एक किताब आई है जो मीडिया छात्रों ही नहीं सबके लिए बेहद उपयोगी है.
Media Coverage:
 हीरेंद्र कहते हैं कि नये लोगों के लिये इमानदारी से किताब लिख कर छपवा लेना और उसके बाद विमोचन कर लेना आसान नहीं हैं. प्रकाशकों के एजेंट आपसे किताब छापने के नाम पर पैसे मांगते हैं और जब तक आप स्थापित व्यक्ति नहीं हैं कोई भी आपको भाव नहीं देता. ऐसे में दिल्ली के माय बुक्स प्रकाशन ने जब अपने नायाब सीरीज के तहत ये किताब छापने का फैसला किया तो बहुत खुशी हुई.
हीरेंद्र कहते हैं कि किसी नये लड़के के लिये इन दिग्गजों से बात करना और मिलना तक आसान नहीं है. इंटरव्यू लेना तो भूल ही जाइये. मैं चार पांच साल तक दिग्गजों के पीछे भागता रहा तब जाकर ये किताब तैयार हो पाई.
किताब में जितने भी नाम हैं वे सब पत्रकारिता और मीडिया के धुरंधर हैं. हीरेंद्र कहते हैं कि कुछ नाम इसलिये छूट गये क्योंकि उन दिग्गजों ने इंटरव्यू देने से मना कर दिया. आखिर वो क्यों किसी बेरोजगार और गुमनाम युवा को इंटरव्यू देते?
हीरेंद्र बताते हैं कि ‘मीडिया के दिग्गज ‘ इन दिग्गजों की यात्रा के बारे में आपको विस्तार से बतायेगी. साथ ही मीडिया छात्रों के मन में जितने भी सवाल और शंकायें होती हैं उन सबके जवाब इस किताब में मौजूद हैं.
 
मीडिया के दिग्गज की लोकप्रियता से उत्साहित युवा लेखक हीरेंद्र मीडिया के दिग्गज पार्ट 2 भी ला रहे हैं. वो कहते हैं कि मेरी कोशिश है अपने समय के मीडिया दिग्गजों को सहेज कर किताब की शक्ल में रख लूँ. ताकि आने वाली नस्लें जान सकें कि हमारे दौर में कैसी पत्रकारिता हो रही थी और कौन लोग उसका नेतृत्व कर रहे थे.

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