बिहार की इस नन्ही बेटी ने गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रोशन किया सूबे का नाम

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बिहार की बेटी सरस्वती ने 25 दिसंबर 2016 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराया जिसके 2 सालों के बाद ऑस्ट्रेलिया से उनको सम्मान मिला। 26 फरवरी 2018 को आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को यह सम्मान ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा मिला और उसके बाद आंध्रप्रदेश सरकार ने यह सम्मान सरस्वती को दिया। सरस्वती कुचिपुड़ी की बाल नृत्यांगना है । छोटी सी उम्र में ही अपने नृत्य के टैलेंट को दिखाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरस्वती ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया है।

‘कुचिपुड़ी’ आंध्रप्रधेश की एक प्रसिद्ध नृत्य शैली है। बताया जा रहा कि 25 दिसंबर 2018 को विजयवाड़ा के आईजीएमसी स्टेडियम में 6,117 नर्तकों व नर्तकियों ने समूह नृत्य पेश कर गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ‘जयमु जयमु’ का नाम दर्ज कराया है। मौके पर गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक ऋषिनाथ ने 6,117 नर्तकों व नर्तकियों ने डांस ग्रुप ‘जयमु जयमु’ के नाम से नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज करने की घोषणा की। राज्य सरकार द्वारा आयोजित पांचवे अंतर्राष्ट्रीय कुचिपुड़ी नृत्य समागम में 12 मिनट की नृत्य प्रस्तुति के दौरान यह रिकॉर्ड बनाया गया। सरस्वती को भी इसी दौरान विश्व रिकॉर्ड के सम्मान से नवाज़ा गया।

नृत्यांगना सरस्वती बिहार के भागलपुर ज़िले के नवगछिया अनुमंडल के अंतर्गत जमुनीआं में रहने वाली है। उनके पिता योगाचार्य गुड्डू जी है जिनका विवाह आँध्रप्रदेश की लक्ष्मी से हुआ। सरस्वती आंध्रप्रदेश में ही अपनी पढाई और नृत्य अभ्यास करती है। आंध्रप्रदेश के प्रकाशम ज़िले के श्री साईं नाट्य कला भारती अंगोल से नृत्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। आज पूरे बिहार को सरस्वती के इस मुकाम पर इतनी छोटी सी उम्र में ही पहुंच जाने पर नाज़ है।

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