बिहार में शुरु हुई तीसरे मोरचे की सुगबुगाहट, कौन हो सकता है सीएम उम्मीदवार

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महागठबंधन और एनडीए से इतर तीसरे मोरचे की चर्चा एक बार फिर से तेज हो चुकी है. ऐसा लगता है जैसे बिहार की राजनीति में एक नया कोण फिर से बन सकता है. राष्ट्रीय जनता दल जिस तरह से छोटे दलों को भाव देने के मूड में नहीं दिख रहा है, उससे तीसरे मोरचे की चर्चाओं और संभावनाओं दोनों को बल मिलता लग रहा है क्योंकि एनडीए भी अपने साथ किसी नए दल को जोड़ने के चक्कर में नहीं है.

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एनडीए में जहां पहले से ही भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी का गठबंधन है तो वहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, विकासशील इंसान पार्टी और हिंदुस्तानी अवाम मोरचा सेकुलर शामिल है.

महागठबंधन में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा, जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी की पार्टी लगातार राजद पर दबाव की राजनीति कर रहा है और राजद इन तीनों को भाव देने के फेर में नहीं है. वहीं भाजपा भी इन तीनों दलों को पिछले विधानसभा चुनाव में आजमा चुका है. इनके साथ रह कर भाजपा को लेने के देने पड़ गए थें. बेहद बुरी हार का सामना एनडीए को 2015 के बिहार विधानसभा को करना पड़ा था.

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ऐसे में बिहार में संभावित तीसरे मोरचा एक नया कोण बनाता दिख सकता है आने वाले विधानसभा चुनावों में. इस तीसरे मोरचे में सीपीआई, रालोसपा, हम सेकुलर, वीआईपी और पप्पू यादव की पार्टी जनाधिकारी पार्टी दिखाई दे सकती है.
अगर सचमुच में इन दलों का कोई तीसरा मोरचा साकार होता है तो इनमें मुख्यमंत्री का दावेदार कौन होगा ? दरअसल ये तीसरा मोरचा भी भानुमति का कुनबा जैसा ही होगा. इसमें भी ढेर सारे सीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं.

इनमें सबसे पहला और मजबूत नाम रालोसपा प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा का हो सकता है क्योंकि इसमें कोई दो राय नहीं कि उपेंद्र कुशवाहा तेजी से बिहार के कुशवाहा समाज के बीच लोकप्रिय हुए हैं. बिहार में यादवों के बाद सर्वाधिक जनसंख्या कुशवाहा बिरादरी की बताई जाती है.

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दूसरा नाम पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का भी सामने आ सकता है क्योंकि मांझी पहले से बिहार के सीएम रह चुके हैं. मांझी भी महत्वाकांक्षा हमेशा आसमान पर रहती है. इसके साथ ही पप्पू यादव भी अगर इस संभावित तीसरे मोरचे में शामिल होते हैं तो वो भी अपनी दावेदारी जताने से चूकेंगे नहीं.

सांगठनिक तौर पर पड़ताल करें कि इन सभी दलों में सर्वाधिक मजबूत संगठन उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के पास ही है, बाकी के दलों के पास तो जिला स्तर भी ठोस संगठन नहीं है. ऐसे में इस तीसरे मोरचे में मुख्यमंत्री पद के सबसे सशक्त उम्मीदवार के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आ सकता है.

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