बिहार में अटल बिहारी वाजपेयी के अविस्मरणीय कार्य

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आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है, वे गुजर चुके हैं लेकिन बिहार के निवासियों के दिल में हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने बिहार को अद्भुत तोहफा दिया है.बिहार की प्रसिद्द भाषा मैथिलि को भारत के संविधान की आठवीं सूची में स्थान दिया। बंटे हुए बिहार को एक किया।

बात साल 1934 की है जब भयानक भूकंप आया था और बिहार में तहलका मच गया था. उन दिनों बिहार में भूकंप की वजह से कोसी पर निर्मित बांध टूट गया, मिथिलांचल दो भागों में बंट गया. एक छोर सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया रह गए तो दूसरी छोर दरभंगा और मधुबनी। ऐसे में एक जिले से दूसरे जिले में जाना कितना मुश्किल था; 70 – 80 किलोमीटर की अतिरिक्त दुरी तय करने के साथ ही परेशानियों का सामनातो स्वाभाविक था लेकिन बिहार की यही हालत रही और वह 78 वर्षों तक लोगों ने झेला। इतनी लम्बी अवधि के बाद 2003 में कोसी महासेतु का शिलान्यास किया गया और 2012 में यह बनकर तैयार हुआ। जिसने बिहार की प्रतीक्षा को समाप्त किया।

बिहार में हरनौत रेल कारखाना, राजगीर आयुध फैक्ट्री ईस्टवेस्ट कॉरिडर,फोरलेन रोड, मुंगेर में गंगापुल, कोसी महासेतु, कोसी रेलपुल , दीघासोनपुर गंगा पुल, अटल बिहारी वाजपेयी की ही सौगात है. उन्होंने मैथिलि भाषा का सम्मान बढ़ाते हुए यह कहा कि मैथिलि इसकी वास्तविक हक़दार है. अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य किये हैं वह अविस्मरणीय है.

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