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बिहार में इन दिनों सियासत लगातार गरमाता जा रहा है. साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार की सियासत में राजनीतिक विसात बिछाई जाने लगी है. आपको बता दें कि बिहार में इन दिनों तीन यात्राएं चल रही है. एक तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सामाधान यात्रा कर रहे हैं तो वहीं बिहार में अपनी राजनीति पैठ बनाने की कोशिश कर रहे प्रशांत किशोर इन दिनों बिहार में जन सुराज यात्रा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस राहुल गांधी के साथ मिलकर पूरे देश में भारत जोड़ों यात्रा कर रही है. इसी क़ड़ी में कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के ने बिहार में हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा शुरुआत की है. बिहार में चल रही इन तीन यात्राओं के कई मायने और मतलब निकाले जा रहे हैं. इस वीडियों में हम समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर बिहार में चल रही इन तीनों यात्राओं से किसे कितना फायदा होने वाला है…

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तो सबसे पहले बात की शुरुआत करते हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सामाधान यात्रा से…

सीएम नीतीश कुमार की समाधान यात्रा की शुरुआत 5 जनवरी से पश्चिम चंपारण के बेतिया जिले से हुई है और इस यात्रा का पहला चरण 29 जनवरी तक चलने वाला है. जिसमें मुख्यमंत्री प्रदेश के 18 जिलों में यात्रा के लिए जाएँगे. ऐसे में यह कहा जा रहाहै कि साल 2024 से पहले नीतीश कुमार सीधे जनता के साथ जुड़ रहे हैं. बता दें कि इस दौरान नीतीश कुमार सभा में जनता को संबोधित नहीं करेंगे. वे सीधे जनता के बीच में जाकर उनकी परेशानियों को सुनेगें. साथ ही सामाधान करेंगे. साथ ही राज्य सरकार के द्वारा चलाई जा रही यात्राओं के बारे में भी जानेंगे. बिहार की सियासत में नीतीश कुमार यात्राओं का बादशाह कहा जाता है. पिछले दो दशक में नीतीश कुमार डेढ़ दर्जन यात्राएं कर चुके हैं. कहा जाता है कि जब जब नीतीश कुमार बिहार की यात्रा पर निकलें हैं बिहार के समीकरण को बदल दिया है. पिछले दिनों जब नीतीश कुमार बीजेपी का साथ छोड़ महागठबंधन के साथ आए हैं तब से बिहार में शराब का मसला गरमाता जा रहा है. ऐसे में बीजेपी जहां नीतीश कुमार को शरबबंदी वाले मामले पर विफल बता रही है ऐसे में आम लोगों के बीच में नीतीश कुमार को लेकर बन रहे नकारात्मकता को वो तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में नीतीश कुमार बिहार के सामाधान यात्रा पर निकल चुके हैं.

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कांग्रेस की हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा. यह यात्रा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से अलग है. दरअसल राहुल गांधी भारत जोड़ों यात्रा कर रहे हैं जिसमें उनकी यात्रा बिहार नहीं आ रही है. ऐसे में बिहार में इस यात्रा की बागडोर कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्किकार्जुन खड़गे और बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद के हाथों में हैं. इस यात्रा की भी शुरुआत 5 जनवरी से बांका जिले से शुरु हो गई है. पहले दिन खड़के 7 किलोमीटर की यात्रा पूरी किया हैं बता दें कि बिहार में हाथ से हाथ जोड़ों यात्रा 20 जिलों में 1200 किलोमीटर चलने वाली है. यह यात्रा 5 जनवरी से 10 जनवरी के बीच में चलने वाली है. पहले चरण में यह यात्रा बांका, भागलपुर और खगड़िया में चलेगी. आइए अब नजर डाल लेते हैं कांगेस की इस यात्रा के मायने मतलब को लेकर… आप हम सभी लोग जानते हैं कि कांग्रेस बिहार में महागठबंधन के साथ है. यानी की महागठबंधन की सरकार है. इसी सरकार के मुख्यमंत्री बिहार में यात्रा पर निकले हुए हैं. इधर कांग्रेस भी यात्रा पर निकल चुकी है. ऐसे में कहा जा रहा है कि बिहार में कांग्रेस भले ही सत्ता के साझेदार हैं लेकिन अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस इन दिनों सड़कों पर चल रही है. जिस तरह से राहुल गांधी की यात्राओं में भीड़ दिख रहा है उसके बाद से कांग्रेस में एक उम्मीद की किरण जगी है जिसके सहारे वे बिहार में हाथ से हाथ जोड़ों यात्रा के सहारे कांग्रेस अपने पुराने आधार को तलासने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अब देखना दिलचस्प यह है कि बिहार में कांग्रेस अपनी इस यात्रा से महागठबंधन में अपना कितना सियासी वजूद कायम रख पाती है.

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आइए बात कर लेते हैं पिछले तीन महीने से बिहार की यात्रा पर निकले प्रशांत किशोर के बारे में और उनके जनसुराज के बारे में… प्रशांत किशोर के जनसुराज यात्रा की शुरुआत 2 अक्टूबर 2022 को किया था. अब इस यात्रा के तीन महिने हो गए हैं. इस यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर अपनी सियाती जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों के बीच में एक बेहतर नेता देने की बात कह रहे हैं. हालांकि इस यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर सबसे ज्यादा नीतीश कुमार पर हमलावर हैं. बता दें कि प्रशांत किशोर की यह यात्रा करीब डेढ़ साल तक यह चलेगी इस दौरान प्रशांत किशोर 3000 किलोमीटर की यात्रा तय करेंगे और बिहार के सभी जिलों में जाएंगे. इन यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सरकार पर हमलावर हैं. और बिहार में अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं.

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