सिक्की कला के लिए समर्पित रहने वाली बिहार की सुधीरा बना चुकी हैं अपनी एक विशिष्ट पहचान !

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कला और संस्कृति में ऐतिहासिक महत्व रखने वाला मधुबनी देश -विदेश में अपनी एक विशिष्टता का परिचायक है। मधुबनी के झंझारपुर के रैयाम गांव की निवासी 44 वर्षीय सुधीरा देवी देश – विदेश में अपने प्रतिभा और मेहनत के दम पर अपनी एक विशेष पहचान बनाने में कामयाब रही। वे दिन-रात, भूखे-प्यासे रहकर सिक्की कला में खुद को समर्पित कर दिया।

आज वे इस कला में एक ऐसा नया आयाम के अाई हैं कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर बन चुका है। ये सिक्की कला के द्वारा महिलाओं की प्रगति में पंख लग सकती है। स्थानीय तौर पर तथा बिक्री केंद्र की स्थापना इस कला के साथ ही इस कला के कलाकारों को भी एक नई मुकाम बनाने का मौका मिलेगा।
सुधिरा देवी सिक्की कला की बारीकियों को सीखकर इसे और भी खूबसूरत बनाया है और देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य शहरों में भी अपनी इस कलाकारी और सिक्की कला का लोहा मनवाया है। बिहार सरकार उनके इस प्रतिभा के लिए उन्हें सम्मानित भी कर चुकी है। पिछले वर्ष ही उन्हें शिल्प विभाग द्वारा नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए चुना गया था। उनका जीवन संघर्षपूर्ण और गरीबी में रही है लेकिन आज उनकी ये बुलंदी, उपलब्धि और पहचान किसी अमीरी की मोहताज नहीं है।

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