बिहार में डीएलएड कोर्स किये बिना पढ़ा रहे शिक्षको पर अब होगी कार्रवाई

0
393

हमारे बिहार के स्कूलो में पढ़ा रहे शिक्षको ने डीएलएड कोर्स अगर नहीं किया है तो अब उनको सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब उन्हें पढ़ाने का मौका नहीं दिया जायेगा | इतना ही नहीं इसके साथ ही उनपर कार्यवाई भी की जा सकती है और उन्हें जे-ल भी भेजा जा सकता है |

आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनआइओएस ने डीएलएड कोर्स के लिए 2017 में नामांकन लिया था, जबकि मार्च 2019 तक सभी एलिमेंट्री कक्षा में पढाने वाले टीचरो को डीएलएड कोर्स करने का निर्देश दिया था | इस निर्देश के अनुसार बिहार के 2 लाख 63 हजार 116 शिक्षको को पंजीकृत किया गया | जिसमे सरकारी, प्राइवेट स्कूलो और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षको ने अपना पंजीकरण करवाया |

अब इनमे 2 लाख 10 हजार 137 टीचरो ने तो सफलता पायी, लेकिन 52 हजार टीचरो ने परीक्षा नहीं दी या अनुतीर्ण हो गए | अब ये टीचर कक्षा एक से पांच तक के बच्चो को नहीं पढ़ा सकते है | बिना डीएलएड कोर्स किये किसी भी टीचर को अब प्राइमरी स्कूल में भी पढाने की अनुमति नहीं है |

एनआईओएस के अध्यक्ष प्रो. सीबी शर्मा ने कहा है, कि कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के पढाने के लिए डीएलएड कोर्स करना अब पूर्णतः अनिवार्य कर दिया गया है | ऐसे शिक्षको को अब इन कक्षाओं में पढ़ने की अनुमति नहीं है | अगर इसकी कोई भी खबर आती है तो इसकी शिकायत पर उन्हें सजा के तौर पर जे-ल भेजा जा सकता है |

यूपी में 68500 शिक्षको की भर्ती की गयी है | अब गैर राज्यों से डीएलएड कोर्स करने वालो की भी नियुक्ति की जाएगी |

आंकड़ो के अनुसार-

सरकारी स्कूलो में कुल 44272 शिक्षक है, जिनमे 37539 ने डीएलएड की परीक्षा दी थी | इस परीक्षा में 6737 शिक्षको की अनुपस्थिती रही |

प्राइवेट स्कूलो में कुल शिक्षको की संख्या 206042 दर्ज की गयी, जिनमे 204312 शिक्षको ने डीएलएड की परीक्षा दी | 40930 शिक्षको ने परीक्षा नहीं दी |

अर्धसरकारी स्कूलों में कुल शिक्षको की संख्या 12482 दर्ज की गयी, जिनमे 12360 ने डीएलएड की परीक्षा दी | इसमें कुल 3144 शिक्षको की अनुपस्थिति रही |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here