बिहारी पहचान 54 : बिहार की बेटी भावना कंठ जो लड़ाकू विमान उड़ाकर बनी देश की दूसरी महिला पायलट

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बिहार की बेटियां भी किसी से कम नहीं है। अपने हुनर और काबिलियत से बिहार की बेटियों ने भी बिहार का नाम देश-विदेश में रौशन किया है। बिहारी पहचान की इस श्रेणी में आज हम बात करेंगे भावना कंठ की जिन्होंने अकेले लड़ाकू विमान उड़ा कर देश की दूसरी वायु सेना की महिला पायलट बनी है।

भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बिहार के बरौनी में हुआ था ,हालांकि भावना का पैतृक गाँव बिहार के दरभंगा ज़िले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाऊर गांव है ‘भावना के पिता इंडियन ऑयल कंपनी में इंजीनियर हैं। भावना की प्रारंभिक पढाई बिहार के बेगूसराय के बरौनी रिफायनरी टाउनशिप में डीएवी विद्यालय में हुआ था , उसके बाद भावना कंठ ने आगे की पढ़ाई के लिए राजस्थान के कोटा चली गई और इंजीनियरिंग की तैयारी करने लगी ,इसी दौरान भावना ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ( NDA ) में जाने की इच्छा व्यक्त की , परन्तु उस वक्त NDA में लड़की नहीं जा सकती थी। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम में अपनी इंजीनियरिंग करने का फैसला किया। भावना कंठ को दसवीं की परीक्षा में 90 फीसदी से अधिक अंक लाने पर मेधा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

भावना कंठ के बचपन के सपना को पंख तब लगा जब उन्होंने भारतीय वायु सेना परीक्षा दी और सफल हुई। और जल्द ही भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक बन गई। फ्लाइंग ऑफिसर भावना कंठ ने 150 घंटे फाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग ली है! 18 जून 2016 को भावना कंठ और उनके दो साथी मोहन सिंह और अवनी चतुर्वेदी को भारतीय वायु सेना में पहली बार महिला युद्ध पायलटों को शामिल किया गया.

भावना ने 16 मार्च 2018 को मिग-21 को उड़ाया! और देश की दूसरी वायुसेना में महिला पायलट बन कर इतिहास में नाम दर्ज कराया ,भावना से पहले यह काम उनकी सहयोगी रही अवनी चतुर्वेदी ने मिग-21 को उड़ाकर देश की पहलीहा महिला पायलट बनने का गौरव हांसिल की। मिग-21 ‘बाइसन’ दुनिया में सबसे तेज लैंडिंग और टेकऑफ के लिए जाना जाता है। यह 340 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से लैंडिंग और टेकऑफ करता है।

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