देशसेवा में समर्पित किया खुद को, रक्तदान को बना चुके हैं पहचान

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देश में लोग भ्रष्टाचार करते हैं चाहे जो जिस स्तर पर हो लेकिन बावजूद अगर देश में उन्नति हो रही है तो उन छुपे हुए शख्स के बदौलत जो वास्तव में अपने देश से प्रेम करते हैं और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित है।

देश सेवा का जुनून
देश सेवा का जुनून सर पर सवार था और एयरफोर्स में पायलेट बनने के धुन भी थी लेकिन पिता ने सख्त रूप से इस क्षेत्र में जाने से मना कर दिया। पढाई पूरी की लेकिन इस बात का मलाल था।

कहाँ से हुई शुरुआत
4 दिसंबर 1971 में देशभर में इंडो-पाक युद्ध में फौजियों को खून की जरुरत थी, उनकी जान बचाने के लिए। देशवासियों से ज्यादा-से ज्यादा खून दिए जाने की अपील की गई थी। बस यही वह पल था जब राजेंद्र गर्ग ने खुद को रक्तदान के लिए समर्पित कर दिया। 66 वर्ष में उन्होंने 192 बार रक्तदान कर चुके हैं न खुद रक्तदान किया बल्कि अपने परिवार से भी रक्तदान करवाया। उन्होंने अपनी शादी भी रक्तदान किये जाने के शर्त पर की. उनका पूरा परिवार 349 बार रक्तदान कर चुका है. पीजीआई के ब्लड बैंक के डायरेक्टर डॉ. जेजी जौली उनके प्रेरणास्रोत हैं.

मिल चुके हैं 198 अवार्ड और गोल्ड मेडल
उन्हें इस श्रेष्ठ कार्य के लिए उन्हें लगभग 198 अवार्ड मिल चुके हैं और हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने भी उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा है। वे हरियाणा के अंबाला जिले से ताल्लुकात रखते हैं और अपने इस मिशन के लिए 1986 में यंग सेवियर्स क्लब बनाया था. आरम्भ में 40-50 रक्तदाता थे लेकिन गुजरते वक्त के साथ 300 रेगुलर ब्लड डोनर इससे जुड़ चुके हैं.

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