फ़िल्में कैसे बदलेंगी सामाजिक एवं राजनैतिक समीकरण. जानिए!

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2019  का  ये सफर आधा ख़तम हो चूका है. ये साल दो चीज़ों के लिए जाना जाएगा। एक जुनून जो हमने इस साल राजनीति में देखा, दूसरा बॉलीवुड में बढ़ती विविधता एवं नए रंग जो सकारात्मक संकेत दे रहे हैं. इस साल की धमाकेदार शुरुआत “Uri : The Surgical  Strike ” से हुई थी. जिसने देशप्रेम को एक नया नज़रिया दिया। राजनीति  का असर फिल्मों पर भी पड़ा. लोकसभा चुनाव से पहले दो फ़िल्में “The  Accidental  Prime Minister ” और “PM  Narendra  Modi ” जैसी फिल्मों का आगमन इंडस्ट्री में हुआ जो अपने कारणों से विवादों में रहीं हैं. अक्षय कुमार की केसरी ने उस संघर्ष का  याद  दिलाया  जो अंग्रेज़ों के खिलाफ इस देश के वीरों ने किया था. राष्ट्रवाद, देशभक्ति, राजनीती, कूटनीति  के रंगों के बीच आयी रणवीर सिंह की “Gully  Boy ”  जिसने  पॉप कल्चर का उदय कैसे हो रहा है और कलाकारों को कौन सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ये बखूबी  दिखलाया है. भारतीय सिनेमा एक क्रांति की ओर  अग्रसर है. पिछले महीने “Article 15 ” जिसने अभिनेता आयुष्मान खुराना ने काम किया है, भारत में जात – पात  के मुद्दे को दर्शकों के समक्ष रखा है.

आने वाली प्रमुख फ़िल्में भी ऐसे हीं रंगों से भरपूर हैं. अगर फ़िल्में समाज का  दर्पण  हैं, तो बॉलीवुड इन अलग अलग रंगों से चमक उठा है. जुलाई 12  को आने वाली पिक्चर “Super 30 ” ज़रूर देखें। सिर्फ एक बिहारी होने के गौरव के लिए नहीं, एक भारतीय और बदलाव की खातिर।  अगर आप दर्शक हैं तो सही फिल्मों का चयन करे. आपसे ये दर्पण बनता है और आपसे हीं ये बदलेगा।

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