च्यवनप्राश बनाने की सरल विधि

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च्यवनप्राश खाने के कई फायदे है इस कारण इसे हर वर्ग के रोगियों को या बिना रोग के भी खाने की सलाह आयुर्वेद में दी जाती हैं| यह constipation की समस्या को दूर करने के साथ immune system,memory और concentration को भी improve करता है, यह aging effects को कम करता हैं,fertility को बढाता है,blood को purify करता है body से toxins remove करता हैं,और liver के लिए भी beneficial है| यह कैल्शियम को absorb करता है जिससे bones और teeth strong होते हैं,प्रोटीन synthesis करता है जिससे muscle tone भी improve होता है,इसके रोज इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियों से शरीर की रक्षा होती हैं| इसे घर पर भी बनाया जा सकता हैं,इसके लिए काम में लिए जाने वाले main ingredients में आंवला और 40 प्रकार की important herbs है जिन्हें किसी भी आयुर्वेदिक store से खरीदा जा सकता हैं|

च्यवनप्राश ingredients– इन्हें 4 प्रकारों में विभक्त किया गया है संसाधन सामग्री,यमक सामग्री,संवाहक सामग्री और प्रेक्षप सामग्री|

संसाधन सामग्री

बिदरीकन्द, सफेद चन्दन, वसाका, अकरकरा, शतावरी, ब्राह्मी,बिल्वा, छोटी हर्र जिसे हरीतकी भी कहते हैं, कमल केशर, जटामासी, गोखरू, बेल, कचूर, नागरमोथा, लौंग, पुष्करमूला, काकडसिंघी, दशमूला, जीवन्ती, पुनर्नवा, अंजीर,अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी के पत्ते, मीठा नीम, संठ, मुनक्का, मुलेठी, इन सभी को बारबार मात्रा में (50 gm) लेना हैं|

यमक सामग्री
घी 250 ग्राम, तिल का तेल – 250 ग्राम

संवाहक सामग्री 
चीनी – तीन किलो

प्रेक्षप सामग्री
पिप्पली -100 ग्राम, वंशलोचन-150 ग्राम, दालचीनी-50 ग्राम, तेजपत्ता-20 ग्राम,

नागकेशर-20 ग्राम, छोटी इलायची-20 ग्राम, केसर-2 ग्राम,शहद-250 ग्राम
विधि

आंवले को धोकर एक बड़े कपडे में बाँध लीजिये| एक बड़े बर्तन में 12 लीटर तक पानी लेकर इसमें संसांधन सामग्री और बंधे हुए आंवले के कपडे की पोटली को डाल दीजिये और इसी बर्तन को तेज़ आंच पर गर्म कीजिये,उबाल आने पर gas को धीमा कर दीजिये,और इस fix temperature पर इसे उबलने दीजिये,इसे तब तक गर्म कीजिये जब तक की आंवले बिलकुल नर्म ना हो जाए, जैसे ही आंवले soft हो जाये तब gas को बंद कर दीजिए| और इसे ऐसे ही 10 से 12 घंटे तक के लिए छोड़ दीजिये|

उसके बाद आंवले की पोटली को निकालकर अलग कर ले,जिसमें herbs के रस को अंदर तक सोख लेने के कारण आंवलो का रंग थोडा dark दिखाई देगा,इन आंवलो को निकालकर इनके seeds को अलग कर ले| और बाकी बचे पानी को छानकर अलग कर ले,यह पानी च्यवनप्राश बनाते वक्त काम आयेगा|

अब इन आंवलो और herbs को मिलाकर mixer में बारीक पीस ले फिर छलनी की सहायता से इसे दबा दबाकर छान ले जिससे आंवले के रेशे छलनी में उपर रह जाए,अब बचे हुए पानी को आंवले के pulp मे मिला ले|

एक लोहे की कढाई में तिल का तेल डालकर गर्म करे,फिर इसी में घी मिलाकर घी के पिघलने तक गर्म करे,तिल का तेल जब अच्छी तरह से गर्म हो जाए तो आंवले का छाना हुआ pulp और sugar डालिए और लगातार हिलाते हुए मिश्रण को गाढ़ा होने तक पका लीजिये, और ध्यान रखे इसके लिए हमेशा लोहे का बर्तन ही ले,कभी भी स्टील के बर्तन का इस्तेमाल ना करे| जब मिश्रण एकदम गाढ़ा हो जाए तब gas बंद कर दीजिये और इसे 5 से 6 घंटे तक इसी लोहे की कढाई में ढककर रख दीजिये,उसके बाद इस मिश्रण को किसी अन्य डिब्बे में निकाल ले|

अब प्रेक्षक सामग्री में शामिल छोटी इलाइची को छीलकर इसके दानो में पिप्पली, वंशलोचन, दालचीनी, तेजपत्ता,नागकेशर के साथ बारीक पीस लीजिये(ऐसा करने के थोड़ी देर बाद ही बर्तन को खोले नहीं तो पिप्पली और वंशलोचन के कारण छींक आनी शुरू हो जायेगी,और इनकी गंध भी नाक में चढ़ जायेगी) और इस पीसी हुयी सामग्री को शहद और केसर के साथ आंवले के मिश्रण में अच्छी तरह से मिला दीजिये,अब च्यवनप्राश बनकर तैयार है|

इस च्यवनप्राश को air tight कांच या plastic के कन्टेनर में भर कर रख सकते हैं और साल भर तक भी यह खराब नहीं होता|

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