छठ महापर्व का खरना आज, जानिए छठ पूजा की सम्पूर्ण पूजा विधि

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छठ महापर्व का आज दूसरा दिन है. आज खरना है. आज के दिन महिलाएं गुड़ की खीर बनाती हैं औ व्रत रहती हैं. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देने से पारण करने तक अन्न- जल ग्रहण नहीं करते हैं. आपको बता दें कि खरना एक प्रकार से शुद्धिकरम की प्रक्रिया है. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद अगले 36 घंटे का कठिन व्रत रका जाता है. छठ पर्व विसेष रूप से छठी मैया और सूर्यदेव की पूजा-अर्चना का पर्व होता है.

छठ महापर्व को लेकर मान्यता यह है कि छठ पूजा कर महिलाएं अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए, छठी मैया से कामना करती हैं. षष्टी माता जिन्हें हिंदू धर्म में छठी मैया कहा गया है, वे खासतौर पर बच्चों को लंबी उम्र प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती है. कई राज्यों में षष्ठी माता को देवी कात्यायनी के रूप में पूजा की जाती है. नवरात्री में षष्ठी तिथि के दिन किये जाने वाला विधान है. छठ पूजा को हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है. आईए जानते हैं छठ पूजा का शुभ मुहूर्त और छठ पूजा की विधि….

छठ महापर्व की पूजा विधि-

टोकरी में रखने के लिए ऩई फल सब्जियां भी रखी जाती है. जैसे कि केला, अनानास, सेब, सिघाड़ा, मूली, अदरक पत्ते, गन्ना, कच्ची हल्दी और नारियल.

  • कार्तिक शुक्ल षष्ठी को पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. इसदिन व्रती घर पर बनाए गए पकवानों और पूजन सामग्री लेकर आस पास के घटा पर पहुंचते हैं.
    घाट पर ईख का घर बनाकर बड़ा दीपक जलाया जाता है. इसे लोग कोशी भरना भी कहते हैं.
  • व्रती घाट पर स्नान करते हैं और पानी में रहकर ही ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.
  • फिर घर जाकर सूर्य देवता का ध्यान करते हुए राभि भर जागरण किया जाता है. जिसमें छठी माता के गीत गाये जाते हैं.
  • सप्तमी केदिन यानी व्रत के चौथे और आखिरी दिन सूर्योदय से पहले घाट पर पहुंचे. इस दौरान अपने साथ पकवानों की टोकरीयां, नारियल और फल भी रकें.
  • फिर उगते हुए सूर्य को जल दें. छठी की कथा सुनें और प्रसाद बांटे
  • और अंत में व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलें.

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