छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

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छठ महापर्व के संध्या अर्ध्य में लोग घाटों पर ठुबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया. छठ गीतों की वजह से अद्भुत समां चारों ओर पसरा है. इस दौरान वातावरण भक्तिमय हो चला है. घाटों तक पहुंचने वाली गालियों साफ-सुथरी और लाइटों से सजी है. मुंबई और विदेशों से भी खबर है कि इस महापर्व को लोग धूमधाम से मना रहे हैं. इस बार को छठ में खास बात यह दिख रही है कि अधिकतर चेहरे पर मास्क लग हैं. छठघाटों पर पिछले सालों से मुकाबले इस बार भीड़ थोड़ी कम है.

छठ पूजा के व्रतधारी आज यानी शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया. सुबह के अर्घ को लेकर पूरी तैयारियां कर ली हैं. दिल्ली में कोरोना काल में यमुना घाट और सार्वजनिक स्थल पर छठ पूजा की अनुमति न होने की वजह से लोगों ने अपने घर की छतों पर ही अर्घ्य देने की तैयारी की है. पटना में भी सभी घाटों पर छठ को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है. इस पर्व की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी पूजा में काम आने वाली चीजें विशुद्ध रूप से प्राकृतिक होती है. इस पर्व में गरीब से लेकर अमीर तक के लोग पूजा करते हैं. पूजन सामग्री प्रकृति के प्रति आभार जताने वाली होती है. इस बार कई छठव्रतियों ने अपने घऱ की छतों पर ही इसका आयोजन किया गया है.

पूजा के लिए लोगों ने प्लास्टिक के टब खरीदे हैं. व्रतधारी टब में भरे पानी में खड़े होकर अर्घ्य दे सकेंगे. कुछ घरों में प्लास्टिक के टब की जगह रबर वाले बड़े टब और ईंट से चारदीवारी बनाकर उस पर प्लास्टिक की पन्नी लगाकर पानी से भर दिया गया है. घाट की तर्ज पर छठ पूजा के लिए घरों में वेदी भी बनाई गई है.

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