चुनावी महासंग्राम में फिसल रहे नेताओं के बोल, इन 4 दिग्गज नेताओं पर लगा बैन

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चुनावी मौसम है। सभी दलों के नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त है। इस चुनावी महासंग्राम में नेताओं के बोल भी खूब फिसल रहे हैं। नेता चुनावी जनसभाओं और रैलियों में प्रचार के दौरान बेतुके और विवादित बयान दे रहे हैं। इतना ही नहीं ये चुनावों पर धार्मिक रंग भी चढ़ाने लगा है। लेकिन, अब ऐसे नेताओं पर चुनाव आयोग ने अपनी तलवार चला दी है। Election Commission ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 4 दिग्गज नेताओं के चुनाव प्रचार पर बैन भी लगाए हैं। चुनाव आयोग ने सबसे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा नेता आजम खान, भाजपा नेता और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर कार्रवाई की।

अगर शब्दों का सही मर्यादा के साथ नहीं किया जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है : – 

शब्दों को तहजीब का साथ न मिले तो अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती, इतना ही नहीं, भाषा की अभद्रता रिश्तों से लेकर माहौल तक, हर चीज में नेगेटिविटी भर देती है। गलत ढ़ंग और गलत मंशा से कहे गए शब्द कुछ भी सही नहीं होने देते। अगर संवाद का तरीका ही गलत हो, तो कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद ही कहां बचती है। अत: यह समझना जरूरी है कि हमें केवल अपनी बात को कहना ही नहीं बल्कि उसे सही ढ़ंग से कहने की भी कला आनी चाहिए, इसकी बुनियाद है शब्दों की शालीनता।

आज के युवाओं को लगता है कि प्रोग्रेसिव हाेने का मतलब है बात-बात पर गाली का उपयोग करना। यहां तक कि पढ़े-लिखे लोग भी हर बात के पीछे गालियां देते दिख जाते हैं। दरअसल, ऐसे बिगड़े बोल अब आत्मविश्वास की कुंजी समझे जाने लगे हैं। इस गलतफहमी से बाहर आना बेहद जरूरी है। अभद्र भाषा कहीं से भी प्रोग्रेसिव होने की निशानी नहीं है।

असभ्य शब्दों को संवाद में शामिल करना कमजोरी :- 

अक्सर लोग तनाव हो या गुस्सा आने पर अमर्यादित शब्दों का उपयोग करते हैं। पर यह जरुरी ताे नहीं कि तनाव का तरीका बिगड़े बोल ही हों। आप लिखकर, मौन रहकर, कहीं घूम करके भी अपने तनाव को कम कर सकते हैं। इसके लिए असभ्य शब्दों काे संवाद में शामिल करना आपकी कमजोरी को दर्शाता है। घर हो या दफ्तर, गालियां देकर या किसी का मजाक बना कर आप किसी तरह औरों से बेहतर साबित नहीं हो सकते। इस ख्याल को मन से निकाल दें कि अभद्र शब्दों के उपयोग से आपकी छवि एक बेबाक, बिंदास और आधुनिक वक्ता की बनेगी, आपकी बात पर लोग गौर करेंगे या आप अपनी बात मनवाने में सफल होंगे। सच तो यह है कि होता इससे बिल्कुल उल्टा है।

वर्चुअल दूनिया के प्रभाव में आने से बचें :-

हाल के समय में फिल्मी पर्दे से लेकर वर्चुअल दुनिया तक अश्लील और अमर्यादित भाषा को खूब बढ़ावा मिला है। बोल्डनेस और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर रोज नए-नए अश्लील शब्द आम जिंदगी में घुसपैठ कर रहे हैं। कल तक जिन कलाकारों काह हम अपना रोल मॉडल समझ कर उनकी नकल करते थे, वे भी भषाई गिरावट के इस दलदल से खुद को बचा नहीं पा रहे हैं। इस अल्ट्रा मॉडर्निज्म कहा जा रहा है। वर्चुअल वर्ल्ड में भी भाषाई अभद्रता खूब देखने काे मिलती है। कहने को तो कुछ कहने का चलन बढ़ गया रहा है। आज हर उम्र के लोगों पर इस बिगड़ैल भाषाा का प्रभाव देखने को मिल रहा है। असल दुनिया में आप इस बेहुदगी बहाव में न बहें।

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