प्रचार के दौरान इन शब्दों का किया प्रयोग तो जेल में होगी मेहमाननवाजी

0
600

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां जारी है इन सब के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान चुनाव का हिस्सा बनने वाले प्रत्याशियों के लिए ज़रूरी जानकारी साझा की है जिसके तहत चुनाव प्रचार के दौरान कुछ बातों का ख़ास ख्याल रखने की अपील की गई है जिसके तहत प्रचार के दौरान प्रत्याशियों को क्या करना है इसको लेकर तो राज्य निर्वाचन आयोग ने कुछ नहीं कहा है लेकिन प्रचार के दौरान क्या नहीं कहना है इसको लेकर ज़रूर राज्य निर्वाचन आयोग ने सारी जानकारी साझा कर दी है, जिसके तहत यदि कोई प्रत्याशी या उसका समर्थक धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता या घृणा फैलाता है तो उसे तीन से पांच वर्ष की सजा हो सकती है यानी की जेल की हवा खाना तय है क्यूंकि यह गैर जमानतीय व संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है ठीक इसी तरह अगर कोई भी प्रत्याशी किसी अन्य प्रत्याशी, किसी के जीवन के ऐसे पहलुओं की आलोचना करता है, जिसकी सत्यता साबित नहीं हो तो उसे भी सजा हो सकती है यानी की अगर कोई प्रत्याशी जीतने के लिए पर्सनल कमेंट का सहारा लेता है तो उनकी खातिरदारी भी जेल में बखूबी होगी हालांकि इस श्रेणी के लोगो को सजा में थोड़ी राहत ज़रूर मिलेगी क्यूंकि यह जमानतीय अपराध है, जिसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के सामने की जाएगी. वहीं निर्वाचन प्रचार के लिए अपनी धार्मिक रणनीति को भी उम्मीदवारों को भूलना होगा क्यूंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ़ कहा है कि मस्जिदों, गिरिजा घरों, मंदिरों, ठाकुरबाडिय़ों या अन्य पूजा स्थलों या धर्मस्थलों का प्रचार मंच के रूप में करना, जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई देना भी गैर जमानतीय अपराध की श्रेणी में शामिल है. यानी की इस बार के चुनाव में भक्ति ही शक्ति है नहीं चलेगा आपको मन में श्रद्धा रखते हुए ही चुनाव में आगे बढना होगा, ज्ञात हो इस बार प्रशासन आदर्श आचार संहिता के पालन के लिए ज्यादा सक्रिय है, क्यूंकि बात पंचायत की हो तो अनियमितता भी इसके साथ खुले और फ्री ऑफर की तरह आती है यही कारण है की सरकार और आयोग इस बार संकल्पित की चुनाव का आयोजन किसी भी हाल में निष्पक्ष ही होगा.

ये तो हो गयी प्रत्याशियों के आचरण की बात जहाँ हमने देखा की प्रचार के दौरान किन किन बातों का परहेज़ करेंगे तो आपको जेल की हवा नहीं खानी होगी अब बात करेंगे थोड़ी जिम्मेदारियों की, जिसके तहत पंचायती राज विभाग के निर्देशानुसार इस बार चुनाव जीतने वाले मुखियों को काम करना होगा यानी की जीतने वाले मुखिया जी को अब अपने कार्य क्षेत्र में एक साल में कम से कम चार बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित करना ही होगा, इन चार बैठकों के अलावा इनके पास ग्राम पंचायतो के विकास की कार्य योजना बनाने के साथ साथ सभी प्रस्तावों को लागू करने की जवाबदेही भी तय होगी. इसके साथ ही ग्राम पंचायतो के लिए तय किये गए टैक्स, चंदे और अन्य सरकारी शुल्क की वसूली के इंतजाम करना भी अब इनकी ही ज़िम्मेदारी होगी.

इन सब के बीच इस बार पंचायत चुनाव में आयोग ने सरपंचो को पंचायती राय व्यवस्था में तीन बड़े अधिकार दिए है जिसके तहत ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने, उनकी अध्यक्षता करने के साथ ही अब ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां भी सरपंचो के पास ही रहेंगी. पंचायत व गांव की सड़कों की देखभाल, पशुपालन व कृषि के व्यवसाय को बढ़ावा देने, सिंचाई की व्यवस्था करने के अलावा अंतिम संस्कार व कब्रिस्तान का रखरखाव करना होगा। सरपंच को कार्यकारी व वित्तीय शक्तियां देने से इस बार सरपंच पद के लिए अभ्यर्थियों की संख्या भी विभिन्न पंचायतों में बढ़ गई है। जबकि पिछले चुनाव में सरपंच व पंच पद के लिए सबसे कम प्रत्याशी मैदान में थे जिसके बाद अब चुनाव को लेकर तैयारियों का सिलसिला जारी है और जल्द ही चुनावी प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here