मार्च से मिलने लगेंगे कोरोना के टीके

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पूरे देश में कोरोना बहुत तेजी से फैलता जा रहा है. कोरोना की दूसरी लहर खतरनाक होती जा रही है. सबसे ज्यादा मामले देश की राजधानी दिल्ली में और महारष्ट्र में सामने आ रहे हैं. बिहार में भी राजधानी पटना समेत पांच जिलों में लगातार कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं. बिहार सरकार ने भी कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए नई गाइडलाइन्स जारी की है. पटना में नए कन्टेनमेंट जोंस बनाए गए हैं.

इधर केंद्रीय स्वास्थय एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद में बन रहे कोरोना टीका केन्द्रों का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने टीका बनने और उसकी उपलब्धता को देखा था. उम्मीद है कि अगले साल मार्च अप्रैल तक कोरोना के टीके आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएँगे. केंद्रीय मंत्री चौबे ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उक्त बातें कही. उन्होंने बताया कि नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय की बैठक में टीकाकरण को लेकर योजना तैयार कर ली गई है.

विधानसभा चुनाव में बने पोलिंग बूथ के तर्ज पर लोगों को कोरोना वायरस के टीके लगाए जाएंगे. टीकाकरण के पहले चरण में प्राथमिकता के आधार पर कोरोना योद्धा जैसे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, एमबीबीएस और पीजी छात्र, इंटर्न, पुलिस कर्मी, बीमार और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्ध को टीके लगाए जाएंगे. मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में मुफ्त टीके देने की बात कही थी उसके अनुरूप पुरे बिहार के लोगों को मुफ्त में कोरोना वायरस के टीके लगाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि विभाग पुरे देश में रोज करीब एक करोड़ लोगों का आरटीपीसीआर मशीन से कोरोना टेस्ट कर रहा है. बिहार के नौ जिलों में अत्याधुनिक कोरोना लैब बनाया जा रहा है. इन लैबों को दिसम्बर माह में शुरू कर दी जाएगी. चुअबे ने कहा कि अगले 15 दिनों में बिहार सरकार को एक कोवास्क मशीन दी जाएगी. इस मशीन से करीब एक से दो हजार कोरोना सैंपल की जांच एक साथ की जा सकेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि भागलपुर और गया समेत बिहार के चार जिलों में निर्माणाधीन सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल मार्च 2021 तक शुरू हो जाएंगे.

आपको बता दें की कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप ने एक बार फिर लोगों को डरा दिया है. केंद्र सरकार के साथ साथ राज्य सरकारे भी कोरोना से बचाव के लिए कई तरीके अपना रही है. देश के कई राज्यों में नाईट कर्फ्यू लगा दिया गया है. बढ़ते कोरोना संक्रमित मामलों को देखते हुए बिहार सरकार ने भी एक गाइड लाइन जारी किया है. जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि जिन जिलों में लगातार 10 प्रतिशत से अधिक कोरोना के आमले मिल रहे हैं उन जिलों में जरुरी सेवाओं को छोड़कर सभी प्रकार के सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारी की काम पर जा सकते हैं. साथ ही सार्वजनिक यात्री वाहनों में भी सिर्फ 50 प्रतिशत यात्री ही यात्रा कर सकते हैं. राज्य सरकार ने यह निर्णय कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर लिया है. बिहार विधानसभा चुनाव और इसके बाद त्योहारों के दौरान लोगों की भीड़ देखी गई थी और अन्य राज्यों की स्थिति को देखते हुए ऐसा अंदेशा है कि बिहार में कोरोना संक्रमित मामले में तेजी आ सकती है. चुनाव और त्योहारों के ख़त्म होने बाद बिहार में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ सकती है. इसे देखते हुए सरकार अलर्ट मोड पर है. पटना में 14 नए कन्टेनमेंट जोन बनाए गए हैं. राज्य के सभी जिलों में मास्क को लेकर जिला प्रशासन एक्टिव है. मास्क चेकिंग अभियान तेज कर दी गई है. मास्क नहीं पहनने वालों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है.

तो कोरोना से बचने के लिए सरकार ने जो प्रोटोकॉल बनाया है उसका पालन करना बहुत जरुरी है. ध्यान रहे कि जब तक वैक्सीन नही आ जाता तब तक बचाव ही कोरोना का एक मात्र इलाज है.

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