15 अगस्त तक भारत में नहीं आ पायेगी कोरोना वैक्सीन

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विश्वव्यापी महामारी कोरोना की संख्या पुरे विश्व में लगभग 1 करोड़ 18 लाख हो चुकी है. वही भारत में इसकी संख्या लगभग साढ़ 7 लाख के आस- पास है जबकि अभी तक के आंकड़ों के अनुसार केवल भारत में 20 हज़ार 642 लोगो ने कोरोना से अपनी जान गंवाई है. कोरोना से निजात पाने के लिए विश्व के कई देशों इसके वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है. कई देश इस काम में काफी आगे पहुंचे भी है- चीन की Sinovac Biotech ने कोरोना वैक्‍सीन का फेज 3 ट्रायल रेगुलेटरी अप्रवूल लेने के बाद, ब्राजील में शुरू कर दिया है. अब तक कुल तीन वैक्‍सीन कैंडिडेट्स ऐसे हैं तो ट्रायल के तीसरे या उससे आगे के दौर में हैं. इनमें Sinovac के अलावा AstraZeneca-यून‍िवर्सिटी ऑफ ऑक्‍सफर्ड और चीन नैशनल फार्मास्‍यूटिकल ग्रुप (Sinopharm) शामिल हैं. फेज 3 में पहुँचने के बाद भी यह कंपनियां यह दावा नहीं कर पा रही है की वे कोरोना की वैक्सीन कब तक लांच कर पाएंगी. लेकिन भारत में ICMR के महानिदेशक बलराम भार्गव ने दावा कर दिया की 15 अगस्त तक कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन आ जाएगी.

ICMR के महानिदेशक बलराम भार्गव का विभागीय पत्र जो वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े है उन 12 संस्थानों, अस्पतालों के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर को लिखा गया है. यह पात्र मीडिया में लिक हो गया. इसमे लिखा है – “भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद् यानि ICMR ने भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड से साझेदारी की है ताकि स्वदेशी ठीके के क्लिनिकल ट्रायल में तेज़ी लायी जा सके. भारत के द्वारा यह पहला देशी वैक्सीन विकसित किया जा रहा है. यह उच्च प्राथमिक वाला प्रोजेक्ट है जिसको सरकार में सर्वोच्य स्तर पर निगरानी की जा रही. यह वैक्सीन SARS COV-2 के स्ट्रेन से ली गयी है. जिस ICMR और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलोजी ने अलग किया है. यह संस्थान भारत बायोटेक से मिलाकर इसके प्रीक्लीनिकल और क्लीनिकल ट्रायल पर काम कर रहा है. उम्मीद की जाती है की वैक्सीन के सभी ट्रायल पुरे हो जाने के बाद 15 अगस्त तक इसे लॉन्च कर दिया जायेगा.भारत बायोटेक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तेज़ी से काम कर रहा है. लेकिन अंतिम नतीज़ा इस बात पर निर्भर करेगा की इस प्रोजेक्ट के तहत होने वाले ट्रायल में शामिल होने वाले संस्थान कितना सहयोग करते है. आप सभी को क्लीनिकल ट्रेल के लिए चुना गया है लोक स्वास्थ्य के हितों को देखते हुए आप सभी को सख्ती से सलाह दी जाती है हर तरह की मंजूरी में तेज़ी लाएं ताकि ट्रायल शुरू हो सके. यह सुनिश्चित करें की 7 जुलाई से पहले ट्रायल के लिए इच्छुक लोगो का पंजीकरण हो जाये . साथ ही इस पत्र में लिखा है कृपया नोट करे – जो सहयोग नहीं करेगा उसे काफी गंभीरता से लिया जायेगा.”

उनके इस दावे पर एक्सपर्ट्स ने इसलिए सवाल उठाने शुरू कर दिए की क्लीनिकल ट्रायल के पहले फेज में भी नहीं पहुंचे इस वैक्सीन को लेकर 15 अगस्त तक लॉन्च करने की बात कैसे कह दी गयी. एक्सपर्ट्स का कहना है की किसी भी वैक्सीन को लॉन्च करने में तक़रीबन 2 साल का समय लग जाता है. अगर बहुत तेज़ी से भी काम हुआ तो भी 1 से डेढ़ साल लगना तय है.

ICMR के इस पत्रनपर कई तरह के सवाल उठ रहे है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ बायोएथिक्स के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर अनंत भान आईसीएमआर की योजना पर हैरानी जताते सवाल खड़े करते हैं.

वो कहते हैं, “वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल के लिए सात जुलाई तक रजिस्टर किया जा सकता है, अगर इसने अभी तक प्री-क्लीनिकल ट्रायल डेवेलपमेंटल स्टेज को पूरा नहीं किया है तो यह वैक्सीन बाज़ार में 15 अगस्त तक कैसे लॉन्च की जा सकती है? क्या एक महीने से भी कम वक़्त में वैक्सीन से जुड़े टेस्ट पूरे किए जा सकते हैं? वो और सवाल करते हुए कहते हैं, “वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए जिन संस्थानों को चुना गया था, उनका आधार क्या था? क्या ये अस्पताल इन टेस्टों के लिए उपयुक्त हैं. और किस लिस्ट में से उन 12 संस्थानों को चुना गया? इन अस्पतालों को आईसीएमआर ने चुना या भारत बायोटेक कंपनी ने? हालाँकि अभी जवाब नहीं मिला है.

वो आगे कहते हैं, “आईसीएमआर ने दो जुलाई को ख़त लिखा है और उन संस्थानों को सात जुलाई तक सारी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कह दिया गया है, इसका मतलब है सिर्फ़ पाँच दिनों में. क्या पाँच दिनों में लोग टेस्ट के लिए तैयार हो जाएंगे? क्या एथिक्स कमेटी इसकी इजाज़त देगी?” आपको बता दे की ICMR की 7 जुलाई की डेडलाइन कल खत्म हो चुकी है. ट्रायल का काम कहाँ तक पहुंचा इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है.

भारत में कोरोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश में क्लीनिकल ट्रायल के लिए जिन 12 संस्थान को चुना गया है उसमे पटना का एम्स भी शामिल है.उन 12 संस्थानों के नाम है-

किंग जॉर्ज अस्पताल, विशाखापटनम
बीडी शर्मा पीजीआईएमएस, यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक
एम्स, नई दिल्ली
एम्स, पटना
जीवन रेखा अस्पताल, बेलगांव, कर्नाटक
गिल्लुर्कर मल्टी-स्पेशिएलिटी अस्पताल, नागपुर, महाराष्ट्र
राना हॉस्पिटल, गोरखपुर
एसआरए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, चेंगलपट्टु, तमिलनाडु
निजाम इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हैदराबाद, तेलंगाना
डॉक्टर गंगाधर साहू, भुव्नेश्वर, ओडिशा
प्रखर हॉस्पिटल, उत्तर प्रदेश
डॉक्टर सागर रेडकर, गोवा

ICMR के महानिदेशक के पत्र लिखने से पहले बीबीसी से बात करते हुए भारत बायोटेक की मैनेजिंग डायरेक्टर सुचित्रा एला बताती है की , “ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल के पहले फ़ेज़ में एक हज़ार लोगों को चुना जाएगा. इसके लिए सभी अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन्स का पालन किया जाएगा. देश भर से उन लोगों को ट्रायल के लिए चुना जाएगा जो कोविड-फ़्री हों. उन लोगों पर क्या प्रतिक्रिया हुई इसको जानने में कम से कम 30 दिन लगेंगे.”

उन्होंने आगे कहा, ” भौगोलिक स्थितियों का भी असर पता लगाने के लिए पूरे भारत से लोगों को चुना है. वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इसकी अच्छी प्रतिक्रिया हो. पहले फ़ेज़ के आंकड़ों को जमा करने में 45 से 60 दिन लगेंगे. ब्लड सैंपल ले लेने के बाद टेस्ट की साइकिल को कम नहीं किया जा सकता है. टेस्ट के नतीज़ों को उन तक पहुंचने में 15 दिन और लगेंगे.”

सुचित्रा एला ने कहा, “पहले फ़ेज़ के नतीज़ों के आधार पर दूसरे फ़ेज़ की इजाज़त मिलेगी. अगर पहले फ़ेज़ के आंकड़े अच्छे होते हैं तो वे दूसरे फ़ेज़ में जा सकेंगे. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा की वोलोग दूसरे फ़ेज़ में तैयार रहने के लिए पहले से ही काम कर रहे हैं. जानवरों पर किए गए परीक्षण के आंकड़े अच्छे हैं. इसने कुछ अच्छे संकेत दिए हैं. उन्हें पूरी आशा है कि ह्यूमन ट्रायल के आंकड़े भी अच्छे होंगे. ट्रायल के दौर से हर अगले क़दम पर मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि अगले तीन से छह महीने में वह बड़े पैमाने पर वैक्सीन बनाने के लिए स्वीकार्य योग्य आंकड़े हासिल कर सकेंगे.”

लेकिन जब उनसे आईसीएमआर के लिखे ख़त के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. अब आप खुद सोचिये की क्या 15 अगस्त तक जिसे आने में लगभग 1 महीना ही बाकि है उस समय तक क्या भारत वैक्सीन बना लेगा? हाँ यह जरूर है की यह भविष्य की बात है लेकिन इतनी भी पेचीदा बात नहीं की आप इसे समझ ना सके.

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