बिहार की बेटी ने हासिल किया ये मुकाम

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बचपन में आसमान में उड़ते एक हवाई जहाज को देख रोमांचित करने वाली एक लड़की को लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के पहले तीन पायलटों में शामिल किया गया है । करीब 1500 महिलाएं भारतीय वायुसेना में हैं । वे विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं । महिलाएं 1991 से हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की उड़ान भर रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी महिलाओं को लड़ाकू विमान के कॉकपिट में जगह देने का फैसला किया था । एक अवसर में इसी मौके को बदलने करने वाली बिहार की लड़की हैं – भावना कंठ।

1 दिसंबर 1992 को भावना का जन्म बरौनी में हुआ था। इंडियन ऑयल कंपनी में एक इंजीनियर की पद पर उनके पिताजी कार्यरत हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। पढाई में बचपन से ही सबसे आगे भावना को 10वीं कक्षा में परीक्षा में 90% से जादा अंक लाने पर आईओसीएल (IOCL) की तरफ से ‘मेधा पुरस्कार’ से नवाजा गया था । अपनी 10वीं तक की स्कूली शिक्षा भावना ने बेगूसराय जिला अंतर्गत बरौनी रिफाइनरी के डीएवी स्कूल से पूरी की। वे बताती हैं कि 10वीं के बाद कोटा के विद्या मंदिर स्कूल में दाखिला लिया, इसके साथ में ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग भी ली। कठिन मेहनत का नतीजा रहा कि बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बी.टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स) के लिए चयन हो गया।

2014 में बी.टेक. करने के बाद भावना का टाटा कंसल्टेन्सी सर्विसेज (TCS) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नौकरी मिल गयी लेकिन उन्हें बचपन से ही वायुसेना में जाने का मन था । वो NDA का परीक्षा अपने हाई स्कूल के दौरान भी देना चाहती थी, लेकिन महिलाओं के लिए उसमे कोई पद नहीं था। भावना को बेंगलुरु में रहने का फायदा मिल गया और उन्होंने 2014 में भारतीय वायुसेना की प्रवेश परीक्षा पास कर ली । उसके बाद उन्हें वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन मिला । फिर वे पायलट के प्रशिक्षण के लिए चुन ली गईं ।
यह भावना के लिए किसी बड़े सपने का पूरा होने का दिन था, जिसके बाद कठिन प्रशिक्षण का दौर चला । उन तीन महिला पायलट्स में अब वे शामिल हो रही हैं, जिन्हें पहली बार वायुसेना का फाइटर प्लेन को उड़ाने का मौका मिलेगा । उनके साथ अवनी चतुर्वेदी (मध्य प्रदेश) और मोहना सिंह (गुजरात) को भी वायुसेना में कमीशन मिलेगा । उत्तराखंड इंजीनियरिंग कॉलेज में भावना का छोटा भाई नीलांबर कंठ है, तो वहीं डीवाइ पाटिल इंजीनियरिंग कॉलेज से छोटी बहन तनुजा कंठ बी.टेक कर रही है । दोनों ‘दीदी’ को अपना रोल मॉडल बताते हैं ।

दरभंगा के बाउर गांव (भावना के पैतृक गांव) निवासी और लाइट काम्बैट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ के निर्माण से जुड़े वैज्ञानिकों में से एक डॉ. मानस बिहारी वर्मा की इच्छा है कि भावना ‘तेजस’ में उड़ान भरे । भावना की उपलब्धियों पर गर्व प्रकट करते हुए वे कहते हैं कि भावना दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए तेजस को उड़ाने के लिए सही उम्मीदवार हैं । दरभंगा जिला अंतर्गत घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव की मूल निवासी भावना कंठ हैदराबाद स्थित एयरक्राफ्ट एकेडमी में फाइटर प्लेन उड़ाने का प्रशिक्षण लेने के बाद 18 जून 2016 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हो गयी । भावना कहती हैं, “बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना देखती थी। हमेशा से चिड़ियों की तरह उड़ना चाहती थी। अब यह सपना पूरा होने जा रहा है”

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