छोटे से उम्र में खाक से लाखपति बनने का सफर, जानें किस तरह दीपिका ने किया संघर्ष

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दिल में जब जज्बा हो तो हर असम्भव दिखने वाला कार्य सम्भव हो जाता है, चारों तरफ बंद दरवाजों को देखने के बाद रौशनी की एक किरण फूटती हैं और राह नजर आ जाती है.

आज हम एक ऐसे जज्बे की बात कर रहे हैं जिसने अपने दम पर खाक से लाख अर्जित कर लिया। झारखंड की बेटी जिसके पिता ऑटो चालक थे , ऑटो चालक होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटी के लिए हर सम्भव प्रयास जुटाया।

13 जून 1994 को जन्मी दीपिका ने न केवल देश में विदेशों में भी अपने नाम के झंडे लहरा आयी. दीपिका इतनी गरीब थी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए 10 रूपये भी उसके पास नहीं थे. मगर उसने गरीबी के सामने घुटने नहीं टेके। उसे तीरन्दाजी का शौक था, वह धनुष-बाण बनाकर जंगल में जाया करती थी और कड़ी अभ्यास किया करती। जब दीपिका को बड़े स्तर पर खेलने का मौका मिला तब वे अपनी प्रतिभा से सबको हैरान कर डाला।

यह कहानी है भारत की मशहूर तीरंदाज दीपिका की जिसने विश्वकप में 31 मई 2015 को अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर कांस्य पदक जीत लिया। वे कई बार रजत पदक भी जीत चुकी हैं और विश्व कप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकि है। आज दीपिका करोड़पति हैं और उनका परिवार भी सम्पन्न हो चुका है.

दीपिका ने जिन विपरीत परिस्थितियों में खुद को आत्मविश्वास से भरपूर बनाये रखी, और जितनी कठिन परिश्रम किया। वे आज के दौर में प्रेरणास्रोत हैं.

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