आरजेडी में बड़ा मतभेद, पार्टी में हुई गोलबंदी अब क्या होगा आगे ?

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राजद(RJD) पार्टी के अंदर ही विभाजन होने और मतभेद होने की बात नई नहीं हैं. राजद पार्टी में एक बार फिर से दो गूट दिख रहा है. राजद के कार्यशैली को लेकर जहां आपस में विवाद है वहीँ विचारधारा भी अलग दिख रही है। पार्टी में दो वरिष्ठ नेताओं के बीचठन गई है। युवा नेता तेजप्रातप और तेजस्वी के बीच के मतभेद जगजाहिर है। दोनों के बीच नाराजगी को कम किया जाने के उद्देश्य से लालू प्रसाद यादव ने रामचंद्र पूर्वे का स्थान जगदानंद सिंह हो दे दिया लेकिन अब जगदानंद सिंह के कार्यभार सँभालते ही रघुवंश प्रसाद सिंह को पार्टी के अनुशासन में कमियां दिख रही है.

जगदानंद सिंह: पार्टी के अंदर अनुशासन का अभाव
जगदानंद सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बन जाने के बाद पार्टी के अंदर मुद्दा गर्म है कि कार्यकर्ताओं के साथ कर्मचारियों वाला व्यवहार नहीं किया जाता है। वे साफ शब्दों में कहते हैं कि पार्टी ऐसे नहीं चलती है। हालाँकि वे किसी का नाम लेने से परहेज किया है. हमेशा पार्टी में अनुशासन को अनिवार्य बताने वलए रघुवंश प्रसाद ने अलग रुख अपना रहे हैं। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान वे अनुशासन को अनिवार्य बताया था लेकिन अब उन्हें ही नागवार क्यों गुजरने लगा। बताया जा रहा है कि उन्हें जगदानंद की कार्यशैली से कम, पार्टी में अपनी कम होती हुई पूछ से अधिक तकलीफ है।

पार्टी में गोलबन्दी
हालाँकि रघुवंश प्रसाद के अनुशासन वाले मुद्दे पर पार्टी के कई नेता उनके तरफ हो गए हैं और इस मुद्दे पर उनसे शिकायतें कर रहे हैं. ऐसे में रघुवंश प्रसाद ने यह भी कह दिया है कि लोग उनसे इस मुद्दे पर शिकायत कर रहे हैं तो वे मौन कैसे रह सकते हैं ?

पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं में विचारधारा की खाँयी
हैदराबाद एनकाउंटर मामले में जहाँ राबड़ी देवी ने उत्साहित होते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से अपराध को रोकने में मदद मिलेगी और वह अपराधियों के लिए एक निवारक के तौर पर कार्य करेगा। हम उसका स्वागत करते हैं वहीँ रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि हैदराबाद पुलिस के द्वारा उठाये गे इस कदम को कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। यह कई संदेहों को पैदा करती है। देश में शासन कानून के द्वारा किया जाना चाहिए भावनाओं के द्वारा नहीं।

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