इस दिवाली 37 साल बाद बन रहा है ऐसा संयोग, जानिए किस मुहूर्त में करे पूजा

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दीपावली के दिन को भगवान भास्कर का दिन कहा जाता है, इस दिन चित्रा नक्षत्र के साथ अमावस्या का संयोग लगभग 37 साल बन रहा है. आज के दिन मां काली की आराधना भी की जाती है. ज्योतिषाचार्य और पंडितो का कहना है कि कार्तिक माह में साल की सबसे अंधेरी रात को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है.

दिवाली के दिन घर की अच्छी तरह से सफाई करनी चाहिए. खासकर मुख्य द्वार को बहुत अच्छी तरह से साफ करें. इसके बाद मुख्य द्वार पर हल्दी का जल छिड़कें. भगवान गणेश को दूब-घास और मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प चढ़ाना चाहिए. ये वस्तुएं दोनों देवी-देवता को अत्याधिक प्रिय हैं.
घर के बाहर रंगोली अवश्य बनाएं. रंगोली को शुभ माना जाता है. मुख्य द्वार पर जूते और चप्पल बिल्कुल न रखें.
रसोई में झूठे बर्तन बिल्कुल न छोड़ें. दिवाली के दिन घर की रसोई में भी दीपक जलाया जाता है. इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा का विधान है.

आज यानि की शनिवार को नरक चतुर्दशी के साथ-साथ छोटी दिवाली भी है. शाम को दीपक जलाया जाएगा. लोककथा है कि नरकासुर ज्योतिषपुर नगर (जो इस समय नेपाल में है) का राजा था. नरकासुर की शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवता परेशान थे. नरकासुर ने संतों के परिवारों की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था. नरकासुर का अत्याचार बढ़ने पर देवता औराषि-मुनि श्रीकृष्ण की शरण में आए. भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष को नरकासुर का वध किया. तब देवताओं ने दिवाली मनाई.
दीपावली मनाने की एक दूसरी कथा है कि आज के ही दिन भगवान राम रावण का वध कर के जब अपने घर अयोध्या लौटे थे तो इस अवसर पर पूरे अयोध्या को सजाया गया था. पूरा अयोध्या दीये से मानों जगमग कर रहा था. इसी खुशी में आज भी दीपावली मनाया जाता है.

पूजा करने का समय
प्रदोष काल: शाम 05:28 बजे से 08:10 बजे तक
पूजा के लिए उत्तम समय (वृश्चिक लग्न): 07:30 बजे से 07:35 बजे
उत्तम में लाभ का चौघड़िया पूजा समय : 08:36 बजे से निशीथ काल जो समय ऊपर है,
इस समय में कर सकते हैं – 08:10 बजे से 10:52 बजे तक
सुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 1:30 बजे तक लाभ अमृत का मुहूर्त (/p)

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