नालंदा के बाद इको टूरिज्म का हब बनेगा बिहार का यह जिला

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बिहार में कई ऐसी जगहें हैं जो एतिहासिक तो हैं ही साथ ही साथ पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है. ऐसे में अब बिहार सरकार इन स्थलों को विकसित करने पर विचार कर रही है साथ ही साथ उस पर काम करना भी शुरू कर दी है. बता दें कि बिहार सरकार पिछले कुछसालों में पर्यटन को लेकर ज्यादा सजग दिख रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में स्थिति ऐतिहासिक और पर्यटन युक्त स्थलों को विकसित करना शुरू कर दिया है. वह चाहे नालंदा हो या फिर रोहतास या बांका के साथ अररिया. बिहार सरकार इसी क़ड़ी में अब जमुई को भी टूरिज्म का हब बनाने जा रही है. बताया जा रहा है कि यहां पर हैगिंग ब्रिज, ट्रैकिंग रूट, गेस्ट हाउस जैसी तमाम सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है.

बिहार सरकार की वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से इको टूरिज्म के तहत यहां पर टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है. इसके लिए झाझा प्रखंड के नकटी पक्षी आश्रयणी, खैरा प्रखंड के कुंडग्राम जन्मस्थान और पंचभूर झरना, बरहट प्रखंड के पतेश्वर मंदिर के पास कटौना पहाड़ी, चकाई प्रखंड स्थित नरोदह झरना और झाझा के सिमुतल्ला स्थित हल्दिया झरना को चिन्हित किया गया है.

बताया तो यह भी गया है कि कुंडग्राम जन्मस्थान के समीप डेढ़ किलोमीटर लंबा हैगिंग ब्रिज यानी की लटकता हुआ पुल बनाया जाएगा. इसके बारे में यह बताया जा रहा है कि यह आने वाले पर्यटकों के लिए आकषर्ण का केंद्र होगा. इसके साथ ही नकटी पक्षी आश्रयमी के पास चार स्टे होम, वाच टावर और बांस का सीटिंग स्पाट बनाया जाएगा. साथ ही पंचभूर झरना के समीप में स्थिट कटौना पहाड़ी के पास नरोहद झरना के पास ट्रैकिंग रूट विकसित करने की बात कही जा रही है. इन क्षेत्रों में लोगों के विकसित हो जाने के बाद यह पर्यटकों के लिए काफी आकर्षक हो जाएगा. जमुई जिले के सिकंदरा और खैरा प्रखंड के सीमा क्षेत्र के जंगल जहां जैनधर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मस्थली क्षत्रियकुंड ग्राम के पास लगभग डेढ़ किलोमीटर हैंगिंग ब्रिज मततब लटकता हुआ पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है.

यहां पर वर्ष 2021 में बिहार का पहला पक्षी महोत्सव का आयोजन हुआ था. पहाड़ों के बीच नागी और नकटी दो जलाशय लोगों को आकर्षित करती है.यही कारण है कि इन जगहों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बिहार के इको टूरिज्म सर्किट से जोड़ने की कोशिश वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग करना शुरू कर दी है. इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इन स्थानों के अलावा जिले के और भी जगहों का चयन होना है, जहां पर प्राकृतिक सुंदरता जैव विविधता को लेकर लोगों को आकर्षित किया जा सके, जिसके लिए वन विभाग काम शुरू कर दिया है. इस पर जमुई जिले के वन पदाधिकारी पीयूष वर्णवाल ने बताया कि ईको टूरिज्म सर्किट से जमुई जिले के अलग-अलग जगहों को जोड़ने का काम शुरू हो गया है. फिलहाल कई जगहों को चयन किया गया है, जहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है.

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