एक पहल: पारम्परिक से प्रोग्रेसिव कृषि की ओर

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पारम्परिक कृषि में मेहनत तो लगती है मगर मुनाफा नहीं मिलता। ऐसी परेशानी से निपटने के लिए बिहार के कृषि में भारी बदलाव होने की सम्भावना नजर आ रही है. बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने मीडिया से कहा कि सरकार कृषि में प्रगति और किसानों के जीवन स्तर सुधारने के लिए उनके आय में वृद्धि करवाने के लिए प्रयासरत है. कृषि विभाग के अनुसार बिहार में की जाने वाली कृषि में कई परिवर्तन होने वाली है। सरकार ना केवल उत्पादकता में वृद्धि पर ध्यान देगी बल्कि बाजार देने की भी कोशिश करेगी। बिहार के जिलों के मिट्टी की उत्पादकता को देखते हुए, फसलों को उपजाने का विभाजन किया है. विशेष जिला के विशिष्ट मिट्टी की उपयोगिता के अनुसार रोहतास में टमाटर, पूर्वी चम्पारण में लहसुन, समस्तीपुर में मिर्च और लीची, अररिया में हरी मिर्च और लीची के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर को चुना गया है.

इस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए 50 एकड़ का कलस्टर बनाया जायेगा जिसमें किसान तो होंगे ही साथ ही बेरोजगार महिला और पुरुष भी होंगे। इन्हे समूह खेती सिखाया जायेगा। समहू खेती फादेमंद होती है क्यूंकि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा मिलता है. उन्हें पारम्परिक खेती से प्रोग्रेसिव खेती की ओर बढ़ाया जायेगा। उन्हें उत्पाद को सुरक्षित रखने, प्रोसेसिंग करने , पैकिंग करने की प्रशिक्षण दी जाएगी। यह योजना अगले पाँच वर्षों तक की है और इन पाँच वर्षों में इस योजना में 16 करोड़ रूपये से अधिक की राशि लगने की बात बताई गयी है. खेती के साथ -साथ खेती से जुड़े कुछ उत्पाद भी बनाये जायेंगे जो काफी लोकप्रिय है जैसे की जेली, जूस।

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