लोस चुनाव से पहले कांग्रेस ने लिया बड़ा फैसला, अब जिलाध्यक्ष पद पर नहीं होगा मनोनयन

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लोकसभा चुनाव 2019 में महज कुछ माह शेष बचे हुए है, ऐसे में विभिन्न पार्टियां अपनी जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने में लगी हुई है। इस मामले में कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में जिला स्तर के पार्टी नेतृत्व में सुधार करने का फैसला किया है। कांग्रेस ने अब जिलाध्यक्ष बनने के लिए मनोनयन की प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला लिया गया है। अब इस पद के लिए निर्वाचन वोटिंग प्रक्रिया से होगी।

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस बदलाव के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की शुरुआत मिजोरम से की जो कि एक सफल प्रयोग साबित हुआ। इस प्रक्रिया के तहत वैसे लोग ही अब जिलाध्यक्ष का उम्मीदवार बन सकते है जो 06 साल तक प्रखंड अथवा जिला स्तर पर कार्य कर चुके हो। वोटिंग प्रक्रिया के माध्यम से ही ये फैसला होगा कि पार्टी का जिलाध्यक्ष कौन बनेगा।

जिलाध्यक्ष को लेकर किये गए इस फैसले के बाद अब जिलाध्यक्षों के काम पर भी विदेश ध्यान दिया जाएगा और अब प्रत्येक जिलाध्यक्षों के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष साल में 02 बार बैठक भी लेंगे। इस मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा है कि जिलाध्यक्षो जी जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब निर्वाचन प्रक्रिया के बाद से लोकसभा- विधानसभा के लिए उम्मीदवार जिलाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष तय करेंगे और सिम्बल पर भी जिलाध्यक्षों का हस्ताक्षर लिया जाएगा।

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