इस परिवर्तन के तहत सरकारी कर्मियों को भी करनी पड़ सकती है 9 घंटे की कार्यपाली

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अब देश में कार्य के घंटों को लेकर बदलाव हो सकते हैं. केंद्र सरकार वेज कोड रूल्स लागू करेगी। इसके तहत सरकार कामकाज को 9 घंटे तक कर सकती है. वेज कोड रूल्स ड्राफ्ट के अंतर्गत अधिकतर पुराने सुझाव ही रखें गए हैं और इसमें नेशनल मिनिमम वेज का जिक्र नहीं किया गया है. अब पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल श्रेणी में बाँटा गया है.

गौरतलब है कि इस ड्राफ्ट में न्यूनतम वेज निर्धारित नहीं की गई है और न ही इसे लेकर कोई स्पष्ट निर्णय दिए गए हैं. ड्राफ्ट में यह जिक्र किया गया है कि एक प्रशिक्षित कमेटी भविष्य में न्यूनतम वेज निर्धारित करने के लिए सरकार से मांग करेगी। इसके अतिरिक्त वर्तमान में चल रहे आठ घंटे की रोजाना कार्य को लेकर भी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया. हालाँकि इसी नियम के तहत 26 दिनों के बाद सैलेरी निर्धारित की जाती है.

बता दें कि जनवरी माह में श्रम मंत्रालय के आतंरिक पैनल ने अपनी एक रिपोर्ट में प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम वेज 375 रूपये निर्धारित करने का अनुरोध किया था और इसे जुलाई 2018 से लागू किये जाने की भी माँग की थी. इस कमिटी में सात सदस्य सम्मिलित थे. जिन्होंने एक महीने की मजदूरी 9750 रूपये रखे जाने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त शहर के कार्यों के लिए 1430 रुपए का हाऊसिंग अलाउंस भी दिए जाने का मशविरा दिया गया था.

प्रस्तावित किये गए ड्राफ्ट में न्यूनतम वेज निर्धारित किये जाने के लिए पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल श्रेणी में बाँटा गया. पहली श्रेणी में 40 लाख और इससे भी अधिक आबादी वाले मेट्रोपोलिटन शहर, 10 से 40 लाख आबादी वाले नॉन मेट्रोपोलिटन शहर दूसरी श्रेणी में वहीँ तीसरी श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया.

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