मोदी मंत्रीमंडल के ये रहे संभावित मंत्री, जानें किसे चुना जाएगा और किसे छोड़ा जाएगा

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लोकसभा चुनाव नतीजों में प्रचंड बहुमत पाकर पीएम नरेंद्र मोदी केंद्र में दूसरी दफा सरकार बनाने जा रहे हैं। गुरुवार 30 मई को वो शपथग्रहण करेंगे। इसी के साथ उनके नए मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चा की शुरुआत हो गई है। ये अंदाज़ लगाया जा रहा है कि इसमें वे कुछ नए चेहरे सम्मिलित हो सकते हैं, एवं कुछ पुराने चेहरे को पीछे छोड़ा भी जा सकता है। संभावित मंत्रियों के नाम को लेकर अंदाज़ लगाने का सिलसिला बिहार में बरक़रार है। यहाँ से राजग के नए सहयोगी जदयू के भी 16 सांसद चुने गए हैं, वहीँ भाजपा के सभी 6 मंत्री चुनाव जीत गए हैं, जबकि लोजपा के लिए एक मंत्री का कोटा तय है।

लोजपा सूत्रों के अनुसार, लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान की ना मौजूदगी में उनके बेटे चिराग पासवान की मोदी मंत्रिमंडल में एंट्री हो सकती है। वैसे, ये भी कहा जा रहा है कि रामविलास पासवान ही खुद मंत्री बने रहेंगे, क्योंकि लोजपा कोटे से एक ही पद प्राप्त हो सकता है। दरअसल, इस मुद्दे पर इसलिए चर्चा हो रही है कि अगर चिराग पासवान मंत्री बनेंगे तो उन्हें राज्यमंत्री ही बनाया जायेगा। ऐसे में कैबिनेट से मंत्री का पद रामविलास पासवान छोड़ देंगे, ऐसी उम्मीद काम ही है। बिहार राजग के दूसरे घातक दल जदयू के तरफ से भी दो या तीन मंत्री बनाये जाने की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि राज्यसभा में जदयू के नेता और नीतीश के नजदीकी कहे जाने वाले आर सी पी सिंह और राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में सम्मिलित किया जा सकता है।

वहीँ दूसरी तरफ, पूर्णिया संसदीय सीट से दूसरी बार चुनकर आये संतोष कुशवाहा के नाम की भी चर्चा है। जबकि ये भी कयास लगाया जा रहा है कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर या फिर मधेपुरा से शरद यादव को पराजित करने वाले दिनेश यादव को भी मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जदयू पिछड़ी जाती, अगड़ी जाती और कुशवाहा के संयोजन को ध्यान में रखकर भी नीति बना रही है। दरअसल, 2020 में बिहार विधानसभा का चुनाव होना है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातियों के संयोजन का भी ध्यान रखेंगे। पिछली बार बिहार में भाजपा के 6 मंत्री थे और सभी 6 सफल हो गए हैं, लेकिन सबको मंत्री बनाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में कुछ के नाम इस सूची से हट भी सकते हैं। जिन चार नामों को तय माना जा रहा है उनमें गिरिराज सिंह, आरके सिंह, रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव अहम हैं। इनमें गिरिराज सिंह एवं रामकृपाल यादव को प्रमोशन भी मिलने की चर्चा है। दरअसल, गिरिराज सिंह ने जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को कठिन मुक़ाबले में बड़े अंतर से पराजित किया है। वहीँ, रामकृपाल यादव ने लालू यादव की पुत्री मीसा भारती को विपरीत परिस्थितियों में दूसरी दफा पराजित किया है।

पीछे छोड़े जाने वाले मंत्रियों में राधामोहन सिंह एवं अश्विनी कुमार चौबे का नाम चर्चा में है। दरअसल, राधामोहन सिंह 70 साल के पार हो चुके हैं, वहीँ अश्विनी चौबे पीएम मोदी के करीबी तो हैं, लेकिन पिछले कार्यकाल में प्रदर्शन के मसले में वो थोड़े पिछड़े माने जा रहे हैं। अपने बयानों को लेकर भी राधामोहन सिंह और अश्विनी चौबे विवादों में रहे हैं। ये जरुरी नहीं की दूसरी पारी में इन दोनों को मंत्रिमंडल में अवसर प्राप्त हो। उधर, पटना साहिब सीट से रविशंकर प्रसाद को शत्रुघ्न सिन्हा के विरूद्ध चुनाव में सफल होने का इनाम मिलना सुनिश्चित माना जा रहा है।

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