कोरोना महामारी के दौरान उभरती मानसिक बीमारियों में परिवार की भूमिका

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कोरोना महामारी मनुष्य के दैनंदिनी कार्यों को लगातार क्षति पहुँचा रही है ऐसे में मानसिक समस्याओं का बढ़ना तय है। कोरोना महामारी के चलते लोगों में नौकरी चले जाने का भय, आर्थिक बोझ, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भोजन एवं अन्य जरूरी सामानों के खत्म हो जाने का डर बन रहा है। इन्हीं सभी विषयों को ध्यान में रखकर चेन्नई स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक ने बताया कि पिछले एक महीने में 6632 मनोरोगियों को फोन के माध्यम से परामर्श दिया जा चुका है ऐसे में मानसिक समस्याएँ बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि इस दौर में परिवार के हर उस सदस्य के साथ समय बिताएँ जिसको किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या महसूस हो रही हो क्योंकि इस बीमारी में परिवार की भूमिका बहुत अहम होती है।

सबसे पहले मानसिक समस्या को जानने का प्रयास करते हैं। मानसिक रोग एक ऐसी बीमारी है जो कभी भी किसी व्यक्ति को हो सकती है। जैसे शारीरिक बीमारी होती है वैसे ही मानसिक बीमारी होती है। इन दोनों में अंतर बस यही पाया जाता है कि जब कोई शारीरिक विकार होता है तो हमें ज्ञात होता है कि हमें क्या परेशानी है और किस अंग में परेशानी है। पर जब मानसिक विकार हमारे शरीर में पैदा होने लगते हैं तो हमें बिल्कुल भी ज्ञात नहीं होता कि हमें क्या हो रहा है? मानसिक विकार मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं; सायकोसिस और न्यूरोसिस मानसिक समस्या की शुरुआती लक्षण में हमारी समझ, सोच-विचार सब बदलने लगता है जिससे हम अपने आपको और दूसरों को समझ नहीं पाते और असामान्य व्यवहार करते है। ऐसे में जब सामाजिक जीवन पूरी तरह ध्वस्त हो और समाज यह मानने लगे कि यह व्यक्ति अब दूसरों के लिए खतरा बन सकता है, ये लक्षण सायकोसिस के होते हैं। यदि परिवार में सुखद माहौल होता है तो इस बीमारी के होने के कम आशंका होती है। दूसरी ओर न्यूरोसिस जैसी बीमारी बहुत खतरनाक नहीं होती फिर भी नुकसानदायक हो सकती है क्योंकिइस बीमारी में व्यक्ति को तनाव, दुश्चिंता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं जो कि अन्य शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इस विकार को दूर करने में परिवार की अहम भूमिका होती है क्योंकि रोगी परिवार के साथ  ज्यादा समय बिताता है और परिवार इन सभी समस्याओं को सुलझाने में उसे सक्षम बनाता है।

समाज में आज भी कई बार मानसिक बीमारी होने पर परिवार के लोग इस बीमारी को झाड़-फूंक, टोना-टोटका से ठीक होने वाली बीमारी समझने लगते हैं। और बाबा या ढोंगी के पास इलाज करवाने पहुँचने लग जाते हैं जिससे ये बीमारी ठीक नहीं होती बल्कि ये सारी चीजें बीमारी को और भी बढ़ा देती है। सामान्य तौर पर सभी परिवार वालों के लिए यह जानना बहुत आवश्यक होता है कि मानसिक बीमारी क्या है? क्यों होती है? इनके क्या लक्षण क्या हो सकते हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है? अगर मानसिक बीमारी की सही जानकारी पहले से ही हो तो वे इस बीमारी को बढ़ने से पहले ही खत्म करने में रोगी की मदद कर सकते है। इन सब चीजों के इतर सबसे अहम और जरूरी बात होती है कि मरीज के साथ घर में सम्मान, प्रेम और सकारात्मक  व्यवहार करें और बात – बात पर उन्हें किसी प्रकार का ताना न मारें और उनका जिस भी क्षेत्र में सही प्रदर्शन हो उसमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें जिससे वे आत्म – सम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर सके, और यह सब तभी संभव है जब परिवार के सभी सदस्य एकसाथ मिलकर मरीज का साथ दें।

लेखक : बापू अर्जुन चव्हाण ,सुधीर कुमार 

         ([email protected],[email protected])

            मनश्चिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता

           7020848090, 9421057320

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