जानिए क्यों? सुशांत सिंह राजपूत मामले में पटना में दर्ज कराई गई FIR

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सुशांत सिंह राजपूत मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार और रिया चक्रवर्ती की ओर लिखित दलील की गई है. बिहार सरकार ने लिखित दलील में कहा है कि मामलें केवल उसी ने FIR दर्ज की है और जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, इसलिए रिया की ट्रांसफर याचिका निष्प्रभावी है. और इसे खारिज किया जाए. इस मामले में बिहार ने कहा है कि मुंबई पुलिस राजनीतिक दबाव में FiR दर्ज नहीं कर रही है और उसने जांच में बिहार पुलिस से सहयोग नहीं किया. बिहार सरकार कि ओर से यह भी कहा गया है कि बिहार पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर अपने क्षेत्राधिकार में ये FIR दर्ज की है. क्योंकि शिकायत एक संज्ञेनीय अपराध की थी.

बिहार सरकार ने अपने दलील में यह भी कहा है कि बिहार पुलिस ने FIR दर्ज कर कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया है, जबकि मुंबई पुलिस ने FIR ना करके कानून के उलट काम किया है. मुंबई पुलिस तो सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मौत कैसे हुई ये जांच कर रही थी और 25 जून को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलते ही ये जांच पूरी हो गई. बिहार सरकार ने आगे कहा है कि अगर मुंबई पुलिस को आगे जांच करनी थी तो उसे FIR दर्ज करनी चाहिए थी.

बिहार सरकार के वकील मनिंदर सिंह ने कहा है कि सुशांत का परिवार पटना में रहता है इसलिए FIR दर्ज करने का क्षेत्राधिकार पटना पुलिस का है. सरकार की ओर से आरोप लगाया गया है कि मुंबई पुलिस ने उसकी टीम से जांच में सहयोग नहीं किया. उसके IPS अफसर विनय तिवारी को क्वारंटीन कर दिया गया और अदालत के भी टिप्पणी करने के तीन दिन बाद छोड़ा गया. उन्होंने यह भी कहा कि रिया तो खुद मामले में गृहमंत्री से सीबीआई जांच की मांग कर चुकी हैं ये उन्होंने माना भी है, इसलिए ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.

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